
भूमिका: अपराध की पहली कड़ी का पर्दाफाश श्रीगंगानगर होटल सामूहिक दुष्कर्म मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस घिनौने अपराध की परतें खुलती जा रही हैं। 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत के मामले में अब पुलिस का पूरा ध्यान उस ‘फर्स्ट पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट’ (अपराध की पहली कड़ी) पर केंद्रित हो गया है, जिसने इस पूरी वारदात की नींव रखी थी। पुलिस जांच में यह बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है कि 18 जून को जब यह मासूम बच्ची अपने घर लौटने के लिए शहर में सुरक्षित साधन तलाश रही थी, तब वह सबसे पहले एक ई-रिक्शा चालक के चंगुल में फंसी थी। इस खुलासे के बाद इस सप्ताह श्रीगंगानगर पुलिस और उसकी विशेष जांच टीम (SIT) ने शहर के ई-रिक्शा चालकों और उनके संदिग्ध संपर्कों के पूरे नेटवर्क पर अपनी पैनी नजर लगा दी है।
18 जून की रात का सच: कैसे शुरू हुआ गुनाह का सफर? पुलिस द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश और पीड़िता के बयानों से यह साफ हुआ है कि 18 जून की रात को जब बच्ची श्रीविजयनगर से लौटकर श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड के समीप पहुंची, तो रात काफी हो चुकी थी। सुनसान सड़क पर खुद को अकेला पाकर वह घर पहुंचने के लिए परेशान थी। इसी दौरान एक ई-रिक्शा चालक (जिसकी पहचान रामबाबू के रूप में हुई) उसके पास आया।
बच्ची की बेबसी और उसके अकेलेपन को भांपकर उस रिक्शा चालक के मन में खोट आ गया। उसने बच्ची को सुरक्षित घर छोड़ने का भरोसा दिलाया और उसे अपने रिक्शे में बिठा लिया। लेकिन घर ले जाने के बजाय, वह उसे बहला-फुसलाकर चहल चौक और सुखाड़िया नगर रोड स्थित उन बदनाम होटलों की तरफ ले गया, जहां पहले से ही अनैतिक गतिविधियां चल रही थीं। कथित तौर पर इस रिक्शा चालक ने चंद हजार रुपयों के कमीशन और लालच में आकर उस अबोध बच्ची को होटल संचालकों और मैनेजरों के हवाले कर दिया, जिन्होंने आगे उसे पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा।
संगठित गिरोह (Organized Gang) का अंदेशा: पुलिस की बड़ी पड़ताल इस सप्ताह पुलिस के आला अधिकारियों और एसआईटी (SIT) के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि क्या यह सिर्फ एक ई-रिक्शा चालक की व्यक्तिगत करतूत थी, या फिर शहर में इस तरह का कोई बड़ा और संगठित गिरोह काम कर रहा है? पुलिस को अंदेशा है कि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य चौराहों पर सक्रिय कुछ ऑटो व ई-रिक्शा चालक, शहर के कुछ बदनाम होटल मालिकों और देह व्यापार के दलालों के साथ सांठगांठ करके एक नेटवर्क चला रहे हैं।
इस नेटवर्क का काम बाहर से आने वाली अकेली महिलाओं, युवतियों या घर से रूठकर निकली नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाना और उन्हें बहला-फुसलाकर इन होटलों तक पहुंचाना होता है, जिसके बदले में इन्हें मोटी रकम या कमीशन मिलता है।
इस सप्ताह पुलिस की ग्राउंड लेवल कार्रवाई: सत्यापन और चेकिंग अभियान इस गंभीर खतरे को देखते हुए इस सप्ताह श्रीगंगानगर पुलिस ने पूरे शहर में एक व्यापक अभियान छेड़ा है:
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रूट और चालकों का सत्यापन (Verification): पुलिस ने नगर परिषद और यातायात विभाग के साथ मिलकर शहर में चलने वाले सभी ई-रिक्शा चालकों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन और बिना रूट परमिट के दौड़ रहे रिक्शा चालकों पर सख्ती बरती जा रही है।
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संदिग्धों की धरपकड़: रेलवे स्टेशन, बीरबल चौक, चहल चौक और सुखाड़िया नगर जैसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में देर रात तक सक्रिय रहने वाले रिक्शा चालकों के मोबाइल फोन रिकॉर्ड (CDR) और उनके संपर्कों की जांच की जा रही है।
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खुफिया इनपुट (Intelligence): सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को प्रमुख चौराहों पर तैनात किया गया है ताकि यह देखा जा सके कि रात के समय सवारियों, विशेषकर महिलाओं के साथ किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि तो नहीं हो रही है।
जनता से अपील और निष्कर्ष पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुंचे बिना जांच पूरी नहीं होगी। इस सप्ताह की कार्रवाई का मकसद न केवल इस मामले के आरोपियों को सजा दिलाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकना है। पुलिस ने आम जनता, विशेषकर ऑटो यूनियनों से भी अपील की है कि यदि उनके बीच कोई भी संदिग्ध व्यक्ति इस तरह के अनैतिक कार्यों में लिप्त दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें, ताकि चंद काली भेड़ों की वजह से पूरे समाज और पेशे को बदनाम होने से बचाया जा सके।