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फसलों को बचाने की जंग: पानी की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर किसानों का अनिश्चितकालीन महापड़ाव, उग्र आंदोलन की चेतावनी

विशेष संवाददाता, श्री गंगानगर

23 मई, 2026

श्री गंगानगर। सीमावर्ती जिले श्री गंगानगर में सिंचाई पानी का संकट गहराने के साथ ही किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। खरीफ की फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने 23 मई को जिला कलेक्ट्रेट के सामने टेंट गाड़कर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। गंगनहर (Gang Canal) में पानी की मात्रा बढ़ाने और पंजाब से राजस्थान के हिस्से का पूरा पानी दिलाने की मांग को लेकर किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। तपती धूप और 46 डिग्री से अधिक के रिकॉर्ड तापमान के बावजूद किसान कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार के सामने डटे हुए हैं, जिससे प्रशासनिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है।

सूख रही हैं नरमा, कपास और ग्वार की फसलें

महापड़ाव को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि यह समय खरीफ की मुख्य फसलों, विशेषकर नरमा, कपास और ग्वार की बिजाई और अगेती फसलों को संभालने का है। लेकिन इस भीषण गर्मी के मौसम में नहरें पूरी तरह सूखी पड़ी हैं या उनमें नाममात्र का पानी आ रहा है। पानी की इस भारी किल्लत के कारण खेतों में खड़ी अगेती फसलें पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।

किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में खेतों तक पानी नहीं पहुंचा, तो अंकुरित हो चुकी फसलें पूरी तरह जल जाएंगी, जिससे किसानों को प्रति बीघा हजारों रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा। कई इलाकों में पानी न मिलने से किसान बिजाई तक नहीं कर पा रहे हैं, जिससे चालू सीजन पूरी तरह चौपट होने का खतरा मंडरा रहा है।

पंजाब पर वादाखिलाफी का आरोप, प्रशासन को दी चेतावनी

धरना स्थल पर आयोजित किसान सभा में वक्ताओं ने पंजाब सरकार और सिंचाई विभाग पर राजस्थान के हिस्से का पानी रोकने का सीधा आरोप लगाया। किसान प्रतिनिधियों ने कहा:

किसान संघर्ष समिति का बयान:

“पंजाब से हमारे हिस्से का जो पानी गंगनहर प्रणाली को मिलना चाहिए, उसमें लगातार कटौती की जा रही है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार केवल आश्वासन दे रही है, जबकि धरातल पर किसान पाई-पाई पानी के लिए मोहताज है। अब यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक नहर के अंतिम छोर (टेल) तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच जाता।”

किसानों ने जिला प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पंजाब से मिलने वाले पानी का हिस्सा तुरंत बहाल करवाकर गंगनहर में पानी की मात्रा नहीं बढ़ाई गई, तो वे चक्का जाम, रेल रोको और सरकारी कार्यालयों के घेराव जैसे उग्र कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कलेक्ट्रेट छावनी में तब्दील

किसानों के महापड़ाव और उग्र रुख को देखते हुए जिला पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरएसी (RAC) की टुकड़ियों के साथ-साथ पुलिस के आला अधिकारी खुद स्थिति पर नजर रख रहे हैं। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वारों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि प्रदर्शनकारी दफ्तरों के भीतर प्रवेश न कर सकें।

इसी बीच, जिला कलेक्टर और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल को वार्ता के लिए बुलाया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे पंजाब के सिंचाई अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और तकनीकी खामियों को दूर कर जल्द ही गंगनहर में पानी की आवक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, किसान केवल ठोस कार्रवाई और पानी छोड़े जाने के आधिकारिक आदेश के बाद ही धरना समाप्त करने की बात पर अड़े हुए हैं।

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