
मुंबई। भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा, विशेषकर मराठी फिल्म जगत के लिए साल 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ हुई है। दिग्गज अभिनेता दिलीप प्रभावलकर और महेश मांजरेकर अभिनीत मराठी फिल्म ‘दशावतार’ (Dashavatar) को 98वें अकादमी पुरस्कारों (Oscars 2026) की ‘कंटेंशन लिस्ट’ (Contention List) में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। यह पहली बार है जब किसी मराठी फिल्म ने मुख्य प्रतियोगिता की इस शुरुआती दौड़ में इतनी मजबूत पैठ बनाई है।
निर्देशक सुबोध खानोलकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि करते हुए इसे ‘लाल मिट्टी’ की कहानी की वैश्विक जीत बताया है।
क्या है ‘कंटेंशन लिस्ट’ और यह क्यों खास है?
ऑस्कर की ‘कंटेंशन लिस्ट’ वह सूची होती है जिसमें दुनियाभर से भेजी गई हजारों फिल्मों में से केवल बेहतरीन 150-250 फिल्मों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है। ‘दशावतार’ का इस सूची में शामिल होना इसे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों के साथ सीधे मुकाबले में खड़ा करता है। इसके साथ ही, यह अकादमी स्क्रीनर्स रूम (जहाँ ऑस्कर सदस्य फिल्में देखते हैं) में प्रदर्शित होने वाली पहली मराठी फिल्म भी बन गई है।
फिल्म की कहानी: कला, परंपरा और संघर्ष का संगम
‘दशावतार’ की कहानी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र की पारंपरिक लोक कला ‘दशावतार’ पर आधारित है।
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बाबुली मिस्त्री का किरदार: फिल्म के केंद्र में बाबुली मिस्त्री (दिलीप प्रभावलकर) हैं, जो जीवन भर भगवान विष्णु के दस अवतारों का मंचन करते रहे हैं। अब उनकी उम्र ढल रही है और आंखों की रोशनी कम हो रही है, लेकिन वे अपनी कला को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
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परंपरा बनाम आधुनिकता: फिल्म बाबुली मिस्त्री और उनके बेटे माधव (सिद्धार्थ मेनन) के बीच के वैचारिक मतभेद को दर्शाती है। जहाँ माधव एक आधुनिक जीवन की तलाश में है, वहीं बाबुली के लिए ‘दशावतार’ केवल एक नाटक नहीं बल्कि उनकी आस्था और पहचान है।
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सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश: फिल्म के क्लाइमेक्स में एक गहरा सामाजिक संदेश दिया गया है, जो न केवल सांस्कृतिक विरासत को बचाने की बात करता है, बल्कि कोंकण की प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण पर भी जोर देता है।
दिग्गज कलाकारों का दमदार अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है:
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दिलीप प्रभावलकर: 81 वर्ष की आयु में दिलीप प्रभावलकर ने बाबुली मिस्त्री के किरदार में जान फूंक दी है। उनके चेहरे के हाव-भाव और आवाज के उतार-चढ़ाव ने अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों का भी ध्यान खींचा है।
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महेश मांजरेकर: फिल्म में महेश मांजरेकर एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में हैं, जो कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाते हैं।
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अन्य कलाकार: सिद्धार्थ मेनन, प्रियदर्शिनी इंदलकर और भरत जाधव ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।
क्षेत्रीय सिनेमा के लिए गौरव का पल
‘दशावतार’ के साथ ही नीरज घेवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ भी ऑस्कर की रेस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है। ‘दशावतार’ की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि कहानी मिट्टी से जुड़ी और ईमानदार हो, तो भाषा की सीमाएं उसे वैश्विक पहचान दिलाने में बाधा नहीं बनतीं।
फिल्म का निर्माण जी स्टूडियोज और ओशन फिल्म कंपनी ने किया है। ऑस्कर के नामांकन की अंतिम घोषणा 22 जनवरी 2026 को होगी और मुख्य समारोह 15 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा।
निष्कर्ष: ‘दशावतार’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय लोक कला का एक वैश्विक दस्तावेज बन गई है। ऑस्कर की इस रेस में शामिल होना ही मराठी सिनेमा की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।