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कवच 4.0: श्रीगंगानगर और राजस्थान रेल नेटवर्क के लिए सुरक्षा का ‘अभेद्य दुर्ग’

रेलवे बोर्ड ने उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) के हाई-डेन्सिटी रूटों पर ‘कवच’ के नवीनतम संस्करण 4.0 को लागू करने की अनुमति दे दी है। यह तकनीक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) ने विकसित किया है।

1. क्या है ‘कवच 4.0’ तकनीक?

कवच एक ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (TCAS) है। यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) उपकरणों का एक सेट है, जिसे इंजनों, सिग्नलिंग सिस्टम और पटरियों में स्थापित किया जाता है।

  • ऑटोमैटिक ब्रेकिंग: यदि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाती हैं, तो कवच तकनीक इसे भांप लेती है और बिना लोको पायलट के हस्तक्षेप के अपने आप ब्रेक लगा देती है।

  • सिग्नल जंपिंग (SPAD) पर रोक: यदि कोई ट्रेन गलती से रेड सिग्नल पार करती है, तो कवच सक्रिय होकर ट्रेन को तुरंत रोक देता है।

  • खराब मौसम में मददगार: श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में सर्दियों में अत्यधिक कोहरा होता है। कवच तकनीक लोको पायलट को कैब के अंदर ही अगले सिग्नल की स्पष्ट जानकारी देती है, जिससे कोहरे में भी ट्रेनें सुरक्षित गति से चल सकेंगी।

2. राजस्थान में निवेश और विस्तार का खाका

भारतीय रेलवे ने राजस्थान के रेल नेटवर्क को सुरक्षित बनाने के लिए भारी निवेश का निर्णय लिया है:

  • कुल कवरेज: राजस्थान के लगभग 5,561 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक को इस सुरक्षा कवच से ढका जाएगा।

  • अनुमानित लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹2,300 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।

  • चरणबद्ध क्रियान्वयन: पहले चरण में दिल्ली-अहमदाबाद और दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्त रूटों को लिया गया है, जिसके बाद श्रीगंगानगर-बीकानेर और जोधपुर खंडों को जोड़ा जा रहा है।

3. श्रीगंगानगर और उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) को लाभ

श्रीगंगानगर जिला, जो पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से सटा है, उत्तर-पश्चिम रेलवे के महत्वपूर्ण जंक्शनों में से एक है। कवच 4.0 के आने से यहाँ निम्नलिखित बदलाव दिखेंगे:

  1. ट्रेनों की समयबद्धता: हादसों का डर कम होने और कोहरे में भी विजिबिलिटी की समस्या हल होने से ट्रेनों की देरी में कमी आएगी।

  2. हाई-स्पीड संचालन: भविष्य में जब ट्रेनों की गति 130-160 किमी प्रति घंटा की जाएगी, तो कवच एक अनिवार्य सुरक्षा मानक के रूप में कार्य करेगा।

  3. मालगाड़ियों की सुरक्षा: इस क्षेत्र से गुजरने वाली जिप्सम, खाद्यान्न और कोयले की मालगाड़ियों का आवागमन अधिक सुरक्षित होगा।

4. कवच 4.0 पिछले संस्करणों से बेहतर क्यों है?

कवच का वर्जन 4.0 पहले के मुकाबले अधिक सटीक और तेज है। यह LTE (4G/5G) आधारित संचार तकनीक का उपयोग करता है, जिससे डेटा ट्रांसफर की गति बढ़ जाती है। यह ऊबड़-खाबड़ इलाकों और घुमावदार ट्रैक पर भी बेहतर तरीके से काम करने में सक्षम है।

5. कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

इतने बड़े पैमाने पर कवच को लगाना एक तकनीकी चुनौती भी है:

  • उपकरणों की स्थापना: हर 2 से 3 किलोमीटर पर ट्रैक के किनारे टावर लगाने और पटरियों पर RFID टैग बिछाने का काम युद्ध स्तर पर करना होगा।

  • इंजनों का अपग्रेडेशन: राजस्थान से गुजरने वाले सभी पुराने इंजनों (Locomotives) को कवच डिवाइस से लैस करना होगा।


निष्कर्ष

रेलवे ट्रैक पर ‘कवच 4.0’ का विस्तार केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि यात्रियों के जीवन की सुरक्षा की गारंटी है। श्रीगंगानगर के यात्रियों के लिए यह खबर राहत भरी है कि आने वाले समय में उनका रेल सफर न केवल आधुनिक होगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा। ₹2,300 करोड़ का यह निवेश राजस्थान के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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