
राजस्थान का उत्तरी क्षेत्र, विशेषकर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़, देश के ‘अन्न भंडार’ के रूप में जाना जाता है। यहाँ की मिट्टी और जलवायु सरसों तथा चना की पैदावार के लिए सर्वोत्तम है। इस वर्ष, सरकार ने किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की एक पारदर्शी व्यवस्था तैयार की है।
1. पंजीकरण और खरीद की समयसीमा
खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए राजफेड ने दो चरणों में कार्यक्रम निर्धारित किया है:
-
पंजीकरण (Registration): किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से शुरू होगी। यह पंजीकरण ई-मित्र केंद्रों या निर्धारित खरीद केंद्रों के माध्यम से किया जा सकेगा।
-
खरीद की शुरुआत (Procurement Start): वास्तविक तुलाई और खरीद का कार्य 25 मार्च 2026 से शुरू किया जाएगा।
2. MSP का गणित: किसानों को कितना होगा लाभ?
केंद्र सरकार ने इस वर्ष रबी फसलों के लिए MSP में अच्छी वृद्धि की है, जिसका सीधा लाभ श्रीगंगानगर के किसानों को मिलेगा:
-
सरसों: इस वर्ष सरसों का समर्थन मूल्य ₹6200 प्रति क्विंटल तय किया गया है। वर्तमान में खुले बाजार में भावों में अस्थिरता को देखते हुए, यह मूल्य किसानों के लिए एक सुरक्षित कवच का काम करेगा।
-
चना: चना की खरीद ₹5875 प्रति क्विंटल पर की जाएगी। चने की दाल और बेसन की बढ़ती मांग के बीच सरकारी खरीद से बाजार में कीमतों का संतुलन बना रहेगा।
3. खरीद प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
किसानों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पंजीकरण के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
-
जन आधार कार्ड: यह मुख्य पहचान और बैंक लिंकिंग के लिए अनिवार्य है।
-
गिरदावरी (Girdawari): संबंधित पटवारी द्वारा प्रमाणित रबी फसल की गिरदावरी, जिससे यह सिद्ध हो सके कि किसान ने कितनी भूमि पर सरसों या चना बोया है।
-
बैंक पासबुक: भुगतान सीधे किसान के खाते में हस्तांतरित (DBT) किया जाएगा, इसलिए सक्रिय बैंक खाते की जानकारी जरूरी है।
-
मोबाइल नंबर: पंजीकरण के बाद तुलाई की तारीख का संदेश (SMS) किसान के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही आएगा।
4. केंद्रों पर व्यवस्था और गुणवत्ता मानक
श्रीगंगानगर जिले में नैफेड (NAFED) और राजफेड द्वारा दर्जनों खरीद केंद्र (मंडियों में) स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर बारदाना (बोरियां), तुलाई मशीनें और श्रमिकों की व्यवस्था पूरी कर ली गई है।
विशेष नोट: सरकारी खरीद केवल उन्हीं फसलों की होगी जो FAQ (Fair Average Quality) मानकों पर खरी उतरेंगी। इसमें नमी की मात्रा, कचरा और खराब दानों का प्रतिशत निर्धारित सीमा के भीतर होना चाहिए। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसल को सुखाकर और साफ करके ही मंडी लाएं।
5. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
सरकारी खरीद का सबसे बड़ा प्रभाव बिचौलियों के खात्मे के रूप में देखा जाता है। जब सरकार सीधे किसान से माल खरीदती है, तो भुगतान सीधे खाते में जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ता है। श्रीगंगानगर जैसे कृषि प्रधान जिले में, सरसों और चने के पैसे आने से आगामी खरीफ सीजन (नरमा और ग्वार) की बुवाई के लिए किसानों को खाद-बीज खरीदने में वित्तीय सहायता मिलेगी।
6. प्रशासन की चुनौतियाँ
इस बार प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बारदाना की उपलब्धता और भंडारण (Storage) की है। पिछले अनुभवों को देखते हुए, वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था की है ताकि खरीदी गई फसल को बेमौसम बारिश से बचाया जा सके।
निष्कर्ष: 15 मार्च से शुरू होने वाला पंजीकरण अभियान श्रीगंगानगर के हजारों किसानों की किस्मत तय करेगा। यदि किसान समय पर पंजीकरण कराते हैं और गुणवत्ता मानकों का ध्यान रखते हैं, तो यह रबी सीजन उनके लिए आर्थिक समृद्धि लेकर आएगा।