
नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही मैदान के बाहर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विवाद के केंद्र में हैं बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान, जिन्हें हाल ही में हुई नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने 9.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि देकर अपनी टीम में शामिल किया है। हालांकि, उनके चयन ने खेल के गलियारों से लेकर दिल्ली की सड़कों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
विवाद की जड़: राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन
बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से चल रहे राजनीतिक अस्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव के कारण, भारत में एक वर्ग बांग्लादेशी खिलाड़ियों की आईपीएल में भागीदारी का विरोध कर रहा है। मुस्तफिजुर रहमान के 9.20 करोड़ रुपये के अनुबंध की खबर आते ही सोशल मीडिया पर ‘बॉयकॉट केकेआर’ जैसे ट्रेंड चलने लगे।
विवाद तब और बढ़ गया जब दिल्ली के कुछ इलाकों में छोटे समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि जब तक सीमा पार स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक बांग्लादेशी खिलाड़ियों को भारतीय घरेलू लीग का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ऐसे समय में पड़ोसी देश के खिलाड़ियों पर बड़ी राशि खर्च करना जनभावनाओं के विपरीत है।
BCCI का आधिकारिक स्पष्टीकरण
बढ़ते विवाद को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों का चयन पूरी तरह से तकनीकी और खेल नियमों के दायरे में किया गया है।
BCCI ने अपने बयान में मुख्य रूप से तीन बातें कहीं:
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सरकारी निर्देश का अभाव: बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत सरकार या विदेश मंत्रालय से बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खेलने पर प्रतिबंध लगाने का कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
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खिलाड़ी की उपलब्धता: मुस्तफिजुर रहमान ने नीलामी के लिए खुद को उपलब्ध कराया था और उनके पास बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी है।
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खेल और राजनीति का मेल: बोर्ड का मानना है कि आईपीएल एक वैश्विक लीग है और जब तक कोई कानूनी या कूटनीतिक बाधा न हो, खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा के आधार पर खेलने का हक है।
KKR के लिए मुस्तफिजुर क्यों हैं जरूरी?
कोलकाता नाइट राइडर्स के खेमे से आ रही खबरों के अनुसार, टीम प्रबंधन ने मुस्तफिजुर को उनकी ‘डेथ ओवर’ गेंदबाजी विशेषज्ञता के कारण चुना है। ईडन गार्डन्स की पिच पर उनकी कटर (Cutter) गेंदे बेहद प्रभावी साबित हो सकती हैं। 9.20 करोड़ रुपये की कीमत यह दर्शाती है कि केकेआर उन्हें अपने गेंदबाजी आक्रमण का मुख्य स्तंभ मानती है। टीम के कोच और प्रबंधन ने फिलहाल इस राजनीतिक विवाद पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है और उनका पूरा ध्यान आगामी सीजन की तैयारियों पर है।
विशेषज्ञों की राय
खेल विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आईपीएल के ब्रांड वैल्यू को प्रभावित कर सकता है, लेकिन मुस्तफिजुर जैसे अनुभवी खिलाड़ी का बाहर होना टूर्नामेंट की गुणवत्ता को कम करेगा। यदि सरकार अंतिम समय में कोई सख्त फैसला नहीं लेती है, तो मुस्तफिजुर रहमान का केकेआर के लिए खेलना तय है।
निष्कर्ष
IPL हमेशा से ही ग्लैमर, क्रिकेट और कभी-कभी विवादों का मिश्रण रहा है। मुस्तफिजुर रहमान का मामला यह दिखाता है कि कैसे खेल के मैदान पर सीमा पार के समीकरण भी असर डालते हैं। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है, लेकिन बीसीसीआई के रुख ने यह साफ कर दिया है कि वे नियमों के मुताबिक ही आगे बढ़ेंगे।