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🥇 डेफलिंपिक्स और विश्व कप में भारत का परचम: निशानेबाजों और मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन

अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच पर भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा जारी है, जहाँ एक ओर डेफलिंपिक्स में निशानेबाजों ने विश्व रिकॉर्ड बनाया, वहीं दूसरी ओर घरेलू मैदान पर मुक्केबाजों ने विश्व कप फाइनल में दमदार शुरुआत की है। यह शानदार प्रदर्शन भारत की खेल प्रतिभा और समावेशी खेल संस्कृति को दर्शाता है।


डेफलिंपिक्स 2025: धनुष श्रीकांत का विश्व रिकॉर्ड स्वर्ण

 

टोक्यो में आयोजित डेफलिंपिक्स 2025 (बाधित श्रवण क्षमता वाले एथलीटों का ओलंपिक) में, भारतीय निशानेबाज धनुष श्रीकांत ने इतिहास रचते हुए देश को गौरव दिलाया।

  • स्वर्ण पदक जीत: धनुष श्रीकांत ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। यह उनकी उत्कृष्ट एकाग्रता और सटीकता का प्रमाण है।

  • विश्व रिकॉर्ड: सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि उन्होंने 252.2 अंकों के साथ एक नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया। यह अंक डेफलिंपिक्स के इतिहास में इस स्पर्धा में फाइनल में हासिल किया गया अब तक का सर्वोच्च स्कोर है।

  • महत्व: डेफलिंपिक्स में इस तरह का प्रदर्शन भारत में समावेशी खेल (Inclusive Sports) की बढ़ती शक्ति को दर्शाता है, जहाँ शारीरिक चुनौतियों के बावजूद एथलीट उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। धनुष श्रीकांत की सफलता उन सभी युवा एथलीटों के लिए एक प्रेरणा है जो शारीरिक बाधाओं को पार करके अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।

धनुष श्रीकांत का यह प्रदर्शन यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।


विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल: भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा

 

देश के अंदर, ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल टूर्नामेंट में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार शुरुआत की है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलते हुए, भारतीय मुक्केबाजों ने अपने पहले दिन के मुकाबलों में अपनी ताकत और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।

  • क्वार्टर फाइनल में जीत: टूर्नामेंट के पहले दिन की समाप्ति तक, भारत के लिए भाग लेने वाले सभी चार मुक्केबाज अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले सफलतापूर्वक जीतकर अगले चरण में पहुँच गए हैं।

  • सेमीफाइनल में प्रवेश: इन सभी मुक्केबाजों ने अब सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है, जिससे भारत के लिए पदक जीतने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। मुक्केबाजी में सेमीफाइनल में पहुँचने का मतलब है कि अब वे कम से कम कांस्य पदक के दावेदार बन गए हैं, और उनकी नज़रें स्वर्ण पदक पर टिकी होंगी।

  • घरेलू लाभ: घरेलू मैदान पर मुक्केबाजी का यह प्रदर्शन न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय मुक्केबाजी के बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किए गए निवेश की सफलता को भी दर्शाएगा।

यह सफलता दर्शाती है कि भारतीय खेल प्रतिभाएँ शारीरिक रूप से सक्षम खेलों और विशेष खेलों दोनों में विश्व स्तर पर पहचान बना रही हैं। धनुष श्रीकांत और मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️