
भारत के प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट, रणजी ट्रॉफी, में राजस्थान के स्टार ऑलराउंडर दीपक हुड्डा ने एक अविस्मरणीय पारी खेलकर क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया है। मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलते हुए हुड्डा ने एक शानदार दोहरा शतक जड़कर न केवल अपनी टीम राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुँचाया है, बल्कि राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए भी अपनी दावेदारी को और पुख्ता किया है।
संघर्ष और हुड्डा का तूफान
यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि मुंबई की टीम रणजी ट्रॉफी में हमेशा एक बड़ी चुनौती पेश करती है। मैच की शुरुआत में, राजस्थान की टीम को शुरुआती झटके लगे, लेकिन इसके बाद दीपक हुड्डा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी पारी की शुरुआत में धैर्य दिखाया, लेकिन एक बार जब वह सेट हो गए, तो मुंबई के गेंदबाज़ों के लिए कहर बनकर टूट पड़े।
हुड्डा ने न केवल टिककर खेला, बल्कि तेज़ गति से रन भी बनाए। उन्होंने अपनी पारी के दौरान शानदार कवर ड्राइव, फ्लिक शॉट्स और कुछ जबरदस्त छक्के लगाए। उनकी पारी ने मध्यक्रम को मजबूती दी और निचले क्रम के बल्लेबाज़ों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण साझेदारियाँ निभाईं।
248 रनों की महाकाव्य पारी
दीपक हुड्डा ने कुल 248 रन बनाए, जो उनके प्रथम श्रेणी करियर की सबसे बड़ी पारियों में से एक है। उनकी इस महाकाव्य पारी में कई चौके और छक्के शामिल थे, जिसने मुंबई के गेंदबाज़ी आक्रमण को पूरी तरह से थका दिया। हुड्डा की यह पारी एक सच्चे ऑलराउंडर की क्षमता को दर्शाती है, जो दबाव में न सिर्फ़ बल्ले से बल्कि अपने अनुभव से टीम का नेतृत्व करता है।
हुड्डा की इस पारी की बदौलत राजस्थान की टीम ने पहली पारी में 500 से अधिक का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसने मैच पर उनका नियंत्रण स्थापित कर दिया।
मुंबई पर दबाव और मैच की स्थिति
राजस्थान द्वारा बनाए गए इस पहाड़ जैसे स्कोर के जवाब में, क्रिकेट की दिग्गज टीम मुंबई पर अब ज़बरदस्त दबाव आ गया है। इस विशाल स्कोर का पीछा करना मुंबई के बल्लेबाज़ों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शुरुआत में, उनके सलामी बल्लेबाज़ों को राजस्थान के तेज़ और स्पिन आक्रमण का सामना करने में मुश्किलें आईं।
मुंबई को अब न केवल यह सुनिश्चित करना है कि वे फॉलो-ऑन से बचें, बल्कि यह भी कि वे राजस्थान को एक बड़ी लीड न लेने दें। दीपक हुड्डा ने न सिर्फ़ बल्ले से बल्कि अपने ऑफ-स्पिन से भी गेंदबाज़ी में योगदान देकर मुंबई के बल्लेबाज़ों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
राष्ट्रीय टीम में वापसी की दावेदारी
दीपक हुड्डा ने अपनी इस ‘हाहाकारी’ पारी से भारतीय क्रिकेट चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वह पहले भी सीमित ओवरों के प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन अपनी जगह स्थायी नहीं कर पाए थे।
उनका यह दोहरा शतक, खासकर मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ, यह साबित करता है कि वह बड़े मैचों में प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। 248 रनों की यह पारी उन्हें न केवल घरेलू क्रिकेट में स्टार बनाती है, बल्कि यह उन्हें भविष्य के टेस्ट क्रिकेट या लंबे फॉर्मेट के लिए भी एक मजबूत दावेदार बनाती है, जहाँ ऑलराउंड प्रदर्शन की हमेशा माँग रहती है।