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सर्वाइकल कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: राष्ट्रव्यापी ‘HPV टीकाकरण’ अभियान का आगाज़

नई दिल्ली। भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 के प्रावधानों के अनुरूप सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े राष्ट्रव्यापी ‘HPV टीकाकरण’ अभियान को हरी झंडी दिखा दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश की भावी पीढ़ी, विशेष रूप से 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को इस घातक बीमारी से सुरक्षा प्रदान करना है। दक्षिण एशिया के अन्य देशों, जैसे नेपाल और भूटान में भी इसी तर्ज पर बड़े अभियान शुरू किए गए हैं, जो क्षेत्र में महिला स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

क्या है HPV और सर्वाइकल कैंसर का संबंध?

सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। प्रतिवर्ष हजारों महिलाएं इस बीमारी के कारण दम तोड़ देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ऐसा कैंसर है जिसे समय पर टीकाकरण और स्क्रीनिंग के जरिए लगभग 100% रोका जा सकता है

9 से 14 वर्ष की उम्र ही क्यों?

डॉक्टरों और स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के अनुसार, HPV का टीका सबसे प्रभावी तब होता है जब इसे संक्रमण के संपर्क में आने से पहले, यानी किशोरावस्था (9-14 वर्ष) में दिया जाए। इस आयु वर्ग में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) टीके के प्रति सबसे बेहतर प्रतिक्रिया देती है। सरकार इस आयु वर्ग की लड़कियों को स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से मुफ्त या रियायती दरों पर टीका उपलब्ध करा रही है।

बजट 2026-27: स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी प्राथमिकता

भारत सरकार ने अपने हालिया बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ निवारक स्वास्थ्य (Preventive Health) पर विशेष ध्यान दिया है। HPV टीकाकरण अभियान को बजट में पर्याप्त धन आवंटित किया गया है ताकि दूर-दराज के गांवों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पेप स्मीयर (Pap Smear) और HPV डीएनए परीक्षण की सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।

जांच और जागरूकता का महत्व

टीकाकरण के साथ-साथ विशेषज्ञों ने नियमित स्क्रीनिंग पर भी जोर दिया है।

  • 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए: विशेषज्ञों की सलाह है कि 30 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक महिला को नियमित अंतराल पर सर्वाइकल कैंसर की जांच (स्क्रीनिंग) करानी चाहिए।

  • शुरुआती पहचान: यदि शुरुआती चरणों में संक्रमण या असामान्य कोशिकाओं का पता चल जाए, तो साधारण उपचार से कैंसर को विकसित होने से रोका जा सकता है।

चुनौतियां और समाज की भूमिका

किसी भी बड़े टीकाकरण अभियान की तरह, इसमें भी ‘भ्रांतियां’ और ‘झिझक’ सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। सरकार ने इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों और डॉक्टरों की मदद ली जा रही है। इसका उद्देश्य अभिभावकों को यह समझाना है कि यह टीका उनकी बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ है।

निष्कर्ष

‘HPV टीकाकरण’ अभियान की शुरुआत भारत को ‘सर्वाइकल कैंसर मुक्त’ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यदि समाज और सरकार मिलकर इस दिशा में काम करते हैं, तो आने वाले दशकों में इस जानलेवा बीमारी के मामलों को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।

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