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विंटर ओलंपिक 2026: ब्राजील के लुकास पिनहेइरो का ‘गोल्डन’ धमाका; विंटर गेम्स के 100 साल के इतिहास में दक्षिण अमेरिका को मिला पहला पदक

मिलान कोर्टिना (इटली), 15 फरवरी 2026

दुनिया के सबसे बड़े शीतकालीन खेल आयोजन ‘विंटर ओलंपिक्स 2026’ में आज एक ऐसा इतिहास रचा गया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। जहाँ ब्राजील को दुनिया भर में उसके गर्म समुद्र तटों और फुटबॉल के लिए जाना जाता है, वहीं आज इसी देश के एक लाल ने बर्फ की ढलानों पर तिरंगा (ब्राजील का ध्वज) लहराकर दुनिया को हैरान कर दिया। ब्राजील के स्कीयर लुकास पिनहेइरो ब्राथेन ने पुरुषों की जायंट स्लैलम (Giant Slalom) स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।

एक सदी का सूखा खत्म

यह जीत इसलिए खास है क्योंकि 1924 में शुरू हुए विंटर ओलंपिक्स के 102 साल के इतिहास में यह ब्राजील ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण अमेरिका महाद्वीप का पहला पदक है। अब तक किसी भी दक्षिण अमेरिकी एथलीट ने शीतकालीन खेलों के किसी भी संस्करण में कोई मेडल नहीं जीता था। लुकास की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी जलवायु या भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं होती।

डिफेंडिंग चैंपियन को दी करारी शिकस्त

इटली के बोर्मियो स्थित स्टेल्वियो ट्रैक पर आयोजित इस फाइनल मुकाबले में लुकास का सामना दुनिया के दिग्गज और डिफेंडिंग चैंपियन स्विट्जरलैंड के मार्को ओडरमैट से था।

  • पहला रन: लुकास ने पहले रन में ही 1:13.92 का समय निकालकर ओडरमैट पर लगभग एक सेकंड की बड़ी बढ़त बना ली थी।

  • फाइनल परिणाम: दूसरे रन में भारी बर्फबारी और धुंध के बावजूद लुकास ने अपना संयम बनाए रखा और कुल 2:25.00 के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मार्को ओडरमैट को सिल्वर मेडल (2:25.58) से संतोष करना पड़ा, जबकि स्विट्जरलैंड के ही लोइक मेलार्ड ने ब्रोंज मेडल जीता।

नॉर्वे से ब्राजील तक का सफर

25 वर्षीय लुकास की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। उनका जन्म ओस्लो में एक नॉर्वेजियन पिता और ब्राजीलियाई मां के घर हुआ था। पहले वे नॉर्वे के लिए खेलते थे, लेकिन 2023 में एक विवाद के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया था। मार्च 2024 में उन्होंने अपनी मां के देश ब्राजील का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया। आज अपनी जीत के बाद भावुक लुकास ने कहा:

“यह पदक मेरे लिए नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए है जो सांबा और फुटबॉल की धरती पर रहते हुए भी बर्फ पर उड़ने का सपना देखते हैं।”

ब्राजील में जश्न का माहौल

इस जीत की खबर मिलते ही ब्राजील में जश्न शुरू हो गया है। राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने सोशल मीडिया पर लुकास को बधाई देते हुए इसे “ब्राजीलियाई खेलों के लिए एक नया क्षितिज” बताया। मिलान के स्टेडियम में मौजूद ब्राजीलियाई फैंस ‘वामोस डैंजर’ (चलो नाचते हैं) के नारों के साथ सांबा डांस करते नजर आए।


निष्कर्ष: लुकास पिनहेइरो ब्राथेन की यह जीत खेल जगत की सबसे बड़ी प्रेरणादायक कहानियों में से एक बन गई है। उन्होंने न केवल एक मेडल जीता, बल्कि दुनिया के नक्शे पर दक्षिण अमेरिका को शीतकालीन खेलों की महाशक्ति के रूप में भी स्थापित कर दिया है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️