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भारतीय फुटबॉल में ऐतिहासिक विरोध: FC गोवा के खिलाड़ियों ने मैदान पर जताया मौन असंतोष

भारतीय फुटबॉल के इतिहास में 25 दिसंबर 2025 का दिन एक अमिट छाप छोड़ गया। AFC चैंपियंस लीग टू (ACL Two) के एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में, FC गोवा के खिलाड़ियों ने खेल भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का एक ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने खेल जगत को हिला कर रख दिया। जैसे ही रेफरी ने मैच शुरू होने की सीटी बजाई, मैदान पर दौड़ने और गेंद को छीनने के बजाय, गोवा के सभी 11 खिलाड़ी अपनी-अपनी जगह पर मौन विरोध (Silent Protest) में मूर्ति की तरह स्थिर खड़े हो गए।

यह दृश्य न केवल स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के लिए चौंकाने वाला था, बल्कि लाइव प्रसारण के जरिए इसे देख रहे लाखों फुटबॉल प्रशंसकों के लिए भी एक बड़ा संदेश था।


विरोध की जड़ें: प्रशासनिक उथल-पुथल और भविष्य का डर

खिलाड़ियों का यह ‘मौन असंतोष’ किसी एक मैच या हार के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह भारतीय फुटबॉल के शीर्ष स्तर पर चल रहे गहरे प्रशासनिक संकट का नतीजा था। पिछले कुछ महीनों से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) कई विवादों में घिरा हुआ है, जिसका सीधा असर मैदान पर खेल रहे एथलीटों पर पड़ रहा है।

  • ISL का अनिश्चित कैलेंडर: इंडियन सुपर लीग (ISL) के कमर्शियल पार्टनर्स और महासंघ के बीच चल रहे टकराव के कारण अगले सीजन का भविष्य अधर में लटका हुआ है। खिलाड़ियों को डर है कि यदि लीग के ढांचे में गिरावट आई, तो उनके पेशेवर अनुबंध (Contracts) और आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

  • कमर्शियल विवाद और फंड की कमी: AIFF और उसके मार्केटिंग पार्टनर्स के बीच कानूनी लड़ाई ने भारतीय फुटबॉल के ग्रासरूट और घरेलू लीग के लिए मिलने वाले फंड को प्रभावित किया है। कई क्लब वित्तीय दबाव में हैं, जिससे खिलाड़ियों की सैलरी और सुविधाओं में कटौती की खबरें आ रही हैं।

  • खिलाड़ियों की आवाज की अनदेखी: FC गोवा के खिलाड़ियों का मानना है कि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेते समय खिलाड़ियों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह विरोध उस चुप्पी को तोड़ने का एक तरीका था।


मैदान पर वह ‘सन्नाटा’ जिसने शोर मचा दिया

मैच शुरू होने के शुरुआती 60 सेकंड तक खिलाड़ी बिल्कुल शांत रहे। विपक्षी टीम (जो एक विदेशी क्लब थी) ने भी खेल की गरिमा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए गेंद को आपस में धीरे-धीरे पास करना शुरू किया, लेकिन हमला नहीं किया।

स्टेडियम में जो पहले शोर-शराबा था, वह अचानक एक भारी सन्नाटे में बदल गया। दर्शकों ने जब महसूस किया कि यह एक संगठित विरोध है, तो पूरा स्टैंड “Save Indian Football” के नारों से गूंज उठा। खिलाड़ियों ने बिना एक शब्द बोले यह स्पष्ट कर दिया कि यदि खेल का प्रशासन विफल होता है, तो खेल की आत्मा भी घायल होती है।


एशियाई और वैश्विक मंच पर प्रभाव

चूंकि यह विरोध AFC के मंच पर हुआ, इसलिए इसकी गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने इस घटना की रिपोर्ट तलब की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से AIFF पर दबाव बढ़ेगा कि वह अपनी आंतरिक राजनीति को सुलझाए और खेल के विकास पर ध्यान दे।

  • सोशल मीडिया का समर्थन: ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर #FootballRebellion और #FCGoaProtest ट्रेंड करने लगा। भारत के पूर्व दिग्गजों और अन्य क्लबों के कप्तानों ने भी परोक्ष रूप से इस साहस की सराहना की।


निष्कर्ष: सुधार की ओर एक कड़ा कदम

FC गोवा के खिलाड़ियों का यह मौन प्रदर्शन इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक खिलाड़ी अब केवल मैदान तक सीमित नहीं हैं; वे अपने अधिकारों और अपने खेल के भविष्य के प्रति सजग हैं। यह विरोध भारतीय फुटबॉल प्रशासन के लिए एक अंतिम चेतावनी की तरह है—या तो सिस्टम में सुधार किया जाए, या फिर मैदान पर इसी तरह के गतिरोध का सामना करने के लिए तैयार रहा जाए।

फुटबॉल प्रेमी अब उम्मीद कर रहे हैं कि इस ऐतिहासिक विरोध के बाद अधिकारी जागेंगे और भारतीय फुटबॉल को उस अंधेरे से बाहर निकालेंगे जिसमें वह पिछले कुछ समय से फंसा हुआ है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️