
28 फरवरी 2026 का दिन भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। वह सपना, जिसे दशकों से घाटी के क्रिकेट प्रेमियों ने देखा था, आज हुबली के मैदान पर सच हो गया। जम्मू-कश्मीर की टीम ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रदर्शन के दम पर घरेलू क्रिकेट की ‘हैवीवेट’ मानी जाने वाली कर्नाटक की टीम को हराकर पहली बार प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया है।
यह जीत केवल एक ट्रॉफी की जीत नहीं है, बल्कि यह उन सभी बाधाओं, कठिन परिस्थितियों और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ एक बड़ी जीत है, जिनसे जूझते हुए जम्मू-कश्मीर का क्रिकेट यहाँ तक पहुँचा है।
मैच का लेखा-जोखा: पहली पारी की वह निर्णायक बढ़त
हुबली के टर्निंग ट्रैक पर खेले गए इस फाइनल मुकाबले में टॉस की भूमिका अहम थी। जम्मू-कश्मीर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का साहसी फैसला किया। टीम के सलामी बल्लेबाजों ने ठोस शुरुआत दी, लेकिन मैच का पासा तब पलटा जब मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने कर्नाटक के स्पिनरों का डटकर सामना किया।
-
जम्मू-कश्मीर की पहली पारी: टीम ने अपनी पहली पारी में शानदार 542 रन बनाए। इसमें टीम के कप्तान और युवा सनसनी ने शानदार शतक जड़ा।
-
कर्नाटक की प्रतिक्रिया: जवाब में कर्नाटक की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाजों ने शुरुआती झटके दिए और फिर स्पिन जोड़ी ने पूरी टीम को मात्र 251 रनों पर समेट दिया।
इस तरह जम्मू-कश्मीर को पहली पारी में 291 रनों की विशाल बढ़त हासिल हुई। रणजी ट्रॉफी के नियमों के अनुसार, यदि फाइनल मैच ड्रॉ पर समाप्त होता है, तो पहली पारी में बढ़त बनाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। खेल के अंतिम दिन, जब कर्नाटक की दूसरी पारी भी संघर्ष कर रही थी, तब दोनों कप्तानों की सहमति और समय की कमी के कारण मैच को ड्रॉ घोषित किया गया और पहली पारी की बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर को चैंपियन बनाया गया।
क्रांतिकारी मोड़: मिथुन मनहास और नेतृत्व का प्रभाव
मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के दिग्गज रहे मिथुन मनहास भावुक नजर आए। उन्होंने इस जीत को “क्षेत्र के क्रिकेट के लिए एक क्रांतिकारी मोड़” करार दिया।
“यह जीत घाटी के हर उस बच्चे के लिए है जो हाथ में बल्ला लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखता है। हमने साबित कर दिया है कि प्रतिभा को किसी भौगोलिक सीमा या परिस्थिति में कैद नहीं किया जा सकता।” — मिथुन मनहास
जम्मू-कश्मीर के कोच और सहयोगी स्टाफ की रणनीति ने इस पूरे सीजन में टीम को एक इकाई के रूप में बांधे रखा। टीम ने इस सफर के दौरान मुंबई, दिल्ली और सौराष्ट्र जैसी बड़ी टीमों को हराकर फाइनल तक का रास्ता तय किया था।
जीत के सामाजिक और खेल मायने
जम्मू-कश्मीर की इस ऐतिहासिक जीत के कई गहरे मायने हैं:
-
बुनियादी ढांचे में सुधार: इस जीत के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि श्रीनगर और जम्मू में अंतरराष्ट्रीय स्तर के और अधिक स्टेडियम और इनडोर अकादमियां विकसित की जाएंगी।
-
आईपीएल और टीम इंडिया के लिए रास्ता: इस टीम के कई खिलाड़ियों (जैसे उमरान मलिक और अब्दुल समद के बाद की नई पीढ़ी) ने अपनी छाप छोड़ी है। अब आईपीएल नीलामी और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें इन खिलाड़ियों पर अधिक मजबूती से टिकेंगी।
-
युवाओं के लिए प्रेरणा: घाटी में क्रिकेट को अब एक गंभीर करियर विकल्प के रूप में देखा जाएगा। यह जीत वहां के युवाओं को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी।
निष्कर्ष
हुबली से लेकर श्रीनगर के लाल चौक तक, आज जश्न का माहौल है। कर्नाटक जैसी 8 बार की चैंपियन टीम को हराना कोई छोटी बात नहीं है। जम्मू-कश्मीर की इस जीत ने रणजी ट्रॉफी के ‘एलिट क्लब’ में एक नया नाम जोड़ दिया है। यह कहानी कड़ी मेहनत, धैर्य और कभी न हार मानने वाले जज्बे की है। भारतीय घरेलू क्रिकेट को अब एक नया ‘पावरहाउस’ मिल गया है।