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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस की दस्तक? केंद्र सरकार अलर्ट, विशेषज्ञों की टीम रवाना

कोलकाता/नई दिल्ली। देश में एक बार फिर एक घातक वायरस ने दस्तक दी है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। आज 13 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और नादिया जिलों में निपाह वायरस (Nipah Virus – NiV) के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय ‘नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम’ (NJORT) को कोलकाता के लिए रवाना कर दिया है।


क्या है वर्तमान स्थिति?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दोनों संदिग्ध मरीजों को तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को निपाह का संदेह हुआ है। वर्तमान में दोनों मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और उनके नमूनों को पुष्टि के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया है।

प्रशासन ने इन मरीजों के संपर्क में आए लगभग 40 लोगों की पहचान कर ली है और उन्हें होम क्वारंटाइन में रहने की हिदायत दी गई है।

केंद्रीय टीम की भूमिका

दिल्ली से भेजी गई विशेष टीम में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और एम्स (AIIMS) के एपिडेमियोलॉजिस्ट (महामारी विशेषज्ञ) शामिल हैं। यह टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर निम्नलिखित कार्य करेगी:

  • वायरस के फैलने के स्रोत (Source of Infection) का पता लगाना।

  • प्रभावित क्षेत्रों में सघन निगरानी (Surveillance) और सैंपलिंग सुनिश्चित करना।

  • स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) के कड़े प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण देना।

निपाह वायरस: एक घातक खतरा

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों (मुख्य रूप से चमगादड़ और सूअर) से इंसानों में फैलता है। यह इंसानों से इंसानों में भी संक्रमित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसकी मृत्यु दर (Fatality Rate) 40% से 75% तक हो सकती है, जो इसे कोविड-19 से भी कहीं अधिक घातक बनाती है।

“निपाह वायरस की अब तक कोई प्रभावी वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बचाव और शुरुआती पहचान ही एकमात्र उपाय है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी अनिवार्य है।”केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री (प्रेस ब्रीफिंग)

स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी: क्या करें और क्या न करें?

सर्दियों के मौसम में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से सटे इलाकों में खजूर का रस (Palm Sap) पीने की परंपरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है:

  1. खजूर का कच्चा रस न पिएं: चमगादड़ अक्सर खजूर के पेड़ों पर बैठते हैं और रस को दूषित कर सकते हैं।

  2. जमीन पर गिरे फल न खाएं: जमीन पर गिरे या कटे-फटे फल चमगादड़ द्वारा खाए हुए हो सकते हैं। फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही खाएं।

  3. बीमार पशुओं से दूर रहें: विशेषकर बीमार सूअरों के संपर्क में आने से बचें।

  4. लक्षणों पर ध्यान दें: यदि किसी को अचानक तेज बुखार, भ्रम (Confusion) या सांस फूलने की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में इससे पहले भी निपाह के मामले देखे गए हैं, इसलिए प्रशासन इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों को जागरूक करने के लिए माइकिंग (Miking) की जा रही है। अगले 48 घंटे, जब तक कि पुणे से रिपोर्ट नहीं आ जाती, राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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