
आज 18 जनवरी 2026 की सुबह दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के निवासियों के लिए एक जहरीली चादर लेकर आई है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 439 के स्तर को पार कर गया है, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में रखा जाता है। कड़ाके की ठंड और शांत हवाओं के कारण प्रदूषक कण (PM 2.5 और PM 10) वायुमंडल की निचली सतह पर जम गए हैं, जिससे पूरा शहर एक ‘गैस चैंबर’ में तब्दील होता नजर आ रहा है।
1. मौसम का ‘थर्मल इन्वर्जन’ प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय दिल्ली-NCR में ‘थर्मल इन्वर्जन’ की स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर गर्म हवा ऊपर उठती है और अपने साथ प्रदूषकों को ले जाती है, लेकिन सर्दी के कारण ठंडी हवा की एक भारी परत ऊपर बनी हुई है, जिसने धुएं और धूल के कणों को जमीन के करीब ही कैद कर लिया है। दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुंचने से न केवल यातायात बाधित हुआ है, बल्कि सांस लेना भी दूषित हवा के कारण दूभर हो गया है।
2. स्वास्थ्य पर गंभीर प्रहार: डॉक्टरों की कड़ी चेतावनी
राजधानी के प्रमुख अस्पतालों (AIIMS और सफदरजंग) के डॉक्टरों ने इस स्थिति को ‘मेडिकल इमरजेंसी’ बताया है। प्रदूषण का यह स्तर स्वस्थ व्यक्तियों के फेफड़ों को भी नुकसान पहुँचा रहा है, जबकि पहले से बीमार लोगों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
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किसे है सबसे ज्यादा खतरा?: बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और वे लोग जो पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या हृदय रोगों से पीड़ित हैं।
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एडवाइजरी: डॉक्टरों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुबह की सैर (Morning Walk) और बाहरी व्यायाम पूरी तरह बंद कर दें। सुबह और शाम के समय हवा में जहर की मात्रा सबसे अधिक होती है। बाहर निकलते समय N-95 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
3. GRAP-4 के कड़े प्रतिबंध लागू
प्रदूषण के स्तर को 400 के पार देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तत्काल प्रभाव से GRAP-4 (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया है। इसके तहत अब दिल्ली-NCR में निम्नलिखित पाबंदियां रहेंगी:
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वाहनों पर रोक: दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले ट्रकों को छोड़कर अन्य भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और BS-VI डीजल वाहनों को ही अनुमति है।
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निर्माण कार्य: सभी प्रकार के सार्वजनिक और निजी निर्माण व विध्वंस (C&D) कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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स्कूल और कार्यालय: कई इलाकों में स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, सरकारी और निजी दफ्तरों को 50% क्षमता के साथ काम करने या ‘वर्क फ्रॉम होम’ देने की सलाह दी गई है।
4. समाधान की चुनौती
दिल्ली की इस समस्या का स्थाई समाधान अभी भी कोसों दूर नजर आता है। पड़ोसी राज्यों में पराली का प्रभाव कम होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर वाहनों का धुआं, डस्ट प्रदूषण और कूड़ा जलाने की घटनाएं इस ‘गंभीर’ स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। प्रशासन ने ‘एंटी-स्मॉग गन’ और पानी के छिड़काव को तेज कर दिया है, लेकिन प्रकृति के सहयोग (तेज हवा या बारिश) के बिना राहत की उम्मीद कम ही है।
निष्कर्ष: 18 जनवरी 2026 की यह धुंध केवल मौसम का हिस्सा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी है। जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती, तब तक नागरिकों को ‘इंडोर’ रहने और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करने की आवश्यकता है।