
पटियाला। भारतीय एथलेटिक्स के पावरहाउस कहे जाने वाले पंजाब के पटियाला में आज ‘इंडियन ओपन थ्रो कॉम्पिटिशन 2026’ का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में देश के सर्वश्रेष्ठ थ्रोअर्स ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, लेकिन सबकी निगाहें जिस खिलाड़ी पर टिकी थीं, वह थे भारत के दिग्गज शॉट पुटर (गोला फेंक खिलाड़ी) तजिंदरपाल सिंह तूर। तूर ने एक बार फिर उम्मीदों पर खरा उतरते हुए न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे आज भी भारत के सबसे बड़े पदक दावेदार हैं।
20.51 मीटर का थ्रो: ताकत और तकनीक का संगम
प्रतियोगिता के मुख्य आकर्षण रहे तजिंदरपाल सिंह तूर ने अपने दूसरे ही प्रयास में 20.51 मीटर की दूरी तक गोला फेंककर अपने प्रतिद्वंद्वियों को रेस से बाहर कर दिया। हालांकि वे अपने स्वयं के नेशनल रिकॉर्ड (21.77 मीटर) से थोड़ा पीछे रहे, लेकिन सीजन की शुरुआत के लिहाज से इस प्रदर्शन को बेहद शानदार माना जा रहा है।
तूर के प्रदर्शन की खास बातें:
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निरंतरता: तूर के छह प्रयासों में से तीन प्रयास 20 मीटर की रेखा को पार करने में सफल रहे।
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तकनीकी सुधार: विशेषज्ञों का मानना है कि चोट से उबरने के बाद तूर के ‘ग्लाइड’ (गोला फेंकने की तकनीक) में काफी निखार आया है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए शुभ संकेत है।
लक्ष्य: एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीडिया से बात करते हुए तजिंदरपाल ने अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, “आज का प्रदर्शन मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। मेरा मुख्य लक्ष्य इस साल के अंत में होने वाले एशियाई खेलों (Asian Games) और कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में भारत के लिए पोडियम फिनिश करना है।”
तूर फिलहाल पटियाला के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NSNIS) में कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनका लक्ष्य 21 मीटर की बाधा को बार-बार पार करना है ताकि वे वैश्विक मंच पर ओलंपिक स्तर के एथलीटों को टक्कर दे सकें।
भाला फेंक में लोहकरे का उदय: जेवलिन में नया सितारा
तूर की जीत के अलावा, आज के आयोजन में एक और नाम गूंजा—वह था युवा भाला फेंक (Javelin throw) खिलाड़ी लोहकरे का। नीरज चोपड़ा के उदय के बाद भारत में जेवलिन के प्रति जो दीवानगी बढ़ी है, लोहकरे उसी नई पौध के प्रतिनिधि बनकर उभरे हैं।
आज की प्रतियोगिता में लोहकरे ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब पहुँचते हुए सबको चौंका दिया। उनकी तकनीक और शारीरिक फुर्ती को देखकर कोचों का मानना है कि वे भविष्य में नीरज चोपड़ा और किशोर जेना की लीग में शामिल हो सकते हैं। लोहकरे की आज की उपलब्धि ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स अब केवल एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि ‘थ्रो’ इवेंट्स में भारत की बेंच स्ट्रेंथ काफी मजबूत हो रही है।
पटियाला बना एथलेटिक्स का हब
इंडियन ओपन थ्रो कॉम्पिटिशन ने एक बार फिर पटियाला की एथलेटिक्स विरासत को जीवंत कर दिया है। प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों के उत्साह ने खिलाड़ियों को प्रेरित किया। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के अधिकारियों ने आयोजन की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रीय कॉम्पिटिशन खिलाड़ियों को ‘मैच रेडी’ बनाने के लिए अनिवार्य हैं।
निष्कर्ष: भारतीय एथलेटिक्स का सुनहरा दौर
तजिंदरपाल सिंह तूर की यह जीत भारतीय एथलेटिक्स के उस सुनहरे दौर का हिस्सा है जहाँ अब पदक की उम्मीद केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है। तूर जैसे अनुभवी खिलाड़ी और लोहकरे जैसे उभरते सितारे मिलकर 2026 के खेल कैलेंडर में भारत का तिरंगा ऊंचा रखने के लिए तैयार हैं। खेल प्रेमियों की निगाहें अब इन खिलाड़ियों के विदेशी दौरों पर टिकी हैं, जहाँ वे दुनिया के बेहतरीन एथलीटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुकाबला करेंगे।