
नई दिल्ली: भारतीय खेल जगत के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। विश्व एथलेटिक्स (World Athletics) की ‘एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट’ (AIU) ने भारत को ‘डोपिंग के अत्यधिक उच्च जोखिम’ (High Risk of Doping) वाली सूची में डाल दिया है। इस कड़े कदम के साथ ही भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) को ‘श्रेणी-A’ (Category-A) में डाउनग्रेड कर दिया गया है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलीटों की साख और उनके प्रदर्शन की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
क्या है ‘श्रेणी-A’ में डाउनग्रेड होने का मतलब?
विश्व एथलेटिक्स के नियमों के अनुसार, ‘श्रेणी-A’ में उन देशों को रखा जाता है जहाँ डोपिंग के मामले सबसे अधिक पाए जाते हैं या जहाँ डोपिंग रोधी तंत्र (Anti-Doping Mechanism) कमजोर होता है। भारत को इस श्रेणी में रखने का सीधा अर्थ यह है कि:
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कड़ी निगरानी: अब भारतीय एथलीटों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले और बाद में कहीं अधिक बारीकी से जांच की जाएगी।
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अनिवार्य परीक्षण: प्रमुख टूर्नामेंटों (जैसे विश्व चैंपियनशिप या ओलंपिक) में भाग लेने से पहले भारतीय एथलीटों को कम से कम तीन ‘आउट-ऑफ-कंपटीशन’ परीक्षणों से गुजरना होगा, जो पिछले 10 महीनों के भीतर होने चाहिए।
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साख को ठेस: अंतरराष्ट्रीय मंच पर अब भारतीय एथलीटों के शानदार प्रदर्शन को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा सकता है, जो ईमानदार खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलीटों के डोप टेस्ट में फेल होने की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि हुई है। विशेष रूप से राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों द्वारा प्रतिबंधित पदार्थों का उपयोग करने के कई मामले सामने आए हैं। कई बार तो डोप टेस्ट के डर से एथलीटों के मैदान छोड़कर भागने की खबरें भी सुर्खियां बनी थीं। इन घटनाओं ने विश्व संस्था को यह संदेश दिया कि भारत में डोपिंग केवल व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित समस्या बनती जा रही है।
फेडरेशन की प्रतिक्रिया: “तंत्र को साफ करने का मौका”
इस झटके के बावजूद, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) के प्रवक्ता और अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला ने सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह खबर सुखद नहीं है, लेकिन इसे तंत्र को पूरी तरह साफ करने के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
सुमारीवाला ने स्पष्ट किया:
“विश्व एथलेटिक्स का यह कदम हमें अपने सिस्टम को और अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने में मदद करेगा। हम डोपिंग को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब हमारी प्राथमिकता राज्य और जिला स्तर पर परीक्षणों को और अधिक सख्त करना है, क्योंकि असली समस्या अक्सर वहीं से शुरू होती है।”
राज्य और जिला स्तर पर कड़ी चुनौती
एथलेटिक्स विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डोपिंग की समस्या की जड़ें जमीनी स्तर पर हैं। युवा एथलीट अक्सर कोचों के गलत मार्गदर्शन या त्वरित सफलता के लालच में आकर प्रतिबंधित दवाओं का सेवन शुरू कर देते हैं। जिला और राज्य स्तर पर डोप परीक्षण की सुविधा न होने के कारण ये खिलाड़ी बच निकलते हैं, लेकिन जब वे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचते हैं, तो पकड़े जाते हैं।
अब AFI को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) के साथ मिलकर न केवल परीक्षण बढ़ाने होंगे, बल्कि एथलीटों और उनके कोचों के लिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाने होंगे।
निष्कर्ष: भविष्य के लिए चेतावनी
भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह एक ‘वेक-अप कॉल’ है। नीरज चोपड़ा जैसे वैश्विक सितारों की सफलता ने जहाँ भारत को एथलेटिक्स के मानचित्र पर गौरव दिलाया है, वहीं डोपिंग के कलंक ने उस चमक को धुंधला करने की कोशिश की है। ‘श्रेणी-A’ में शामिल होना एक चेतावनी है कि यदि अब सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में भारतीय एथलीटों पर और अधिक कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं। यह समय केवल निगरानी बढ़ाने का नहीं, बल्कि खेलों की संस्कृति में नैतिकता और शुचिता को फिर से स्थापित करने का है।