
खेल डेस्क। क्रिकेट के खेल को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, और आज 18 फरवरी 2026 को टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में एक ऐसा पन्ना लिखा गया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। 2021 की विश्व विजेता और क्रिकेट की महाशक्ति मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई है। यह न केवल ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि जिम्बाब्वे जैसी टीम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने पहली बार सुपर-8 में अपनी जगह पक्की कर ली है।
समीकरणों का खेल और कुदरत का करिश्मा
ग्रुप-B के समीकरण बेहद पेचीदा मोड़ पर थे। ऑस्ट्रेलिया को सुपर-8 की दौड़ में बने रहने के लिए जिम्बाब्वे और आयरलैंड के बीच होने वाले मैच के नतीजे पर निर्भर रहना था। अगर आयरलैंड यह मैच जीत जाता, तो नेट रन रेट (NRR) के आधार पर ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदें जिंदा रहतीं।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज के मुकाबले में बारिश ने खलल डाला और मैच को बिना एक भी गेंद फेंके रद्द करना पड़ा। आईसीसी के नियमों के अनुसार, मैच रद्द होने पर दोनों टीमों (जिम्बाब्वे और आयरलैंड) को 1-1 अंक दिया गया। इस 1 अंक ने जिम्बाब्वे के कुल अंकों को ऑस्ट्रेलिया से ऊपर पहुंचा दिया और इसी के साथ जिम्बाब्वे ने सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर लिया।
ऑस्ट्रेलिया की विदाई के मुख्य कारण
ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम का ग्रुप स्टेज से बाहर होना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विदाई की पटकथा टूर्नामेंट की शुरुआत में ही लिखी जा चुकी थी:
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जिम्बाब्वे से मिली हार: टूर्नामेंट के अपने शुरुआती मैचों में ऑस्ट्रेलिया को जिम्बाब्वे के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। उस मैच में जिम्बाब्वे के स्पिनरों के सामने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह बेबस नजर आए थे।
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श्रीलंका के खिलाफ खराब प्रदर्शन: श्रीलंका के खिलाफ अहम मुकाबले में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम दबाव नहीं झेल सकी और करीबी अंतर से मैच गंवा बैठी।
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खराब नेट रन रेट: लगातार दो हार के बाद ऑस्ट्रेलिया का नेट रन रेट इतना गिर गया था कि वे पूरी तरह से अन्य टीमों के नतीजों पर निर्भर हो गए थे।
रिकी पोंटिंग का तीखा हमला
ऑस्ट्रेलिया की इस शर्मनाक विदाई पर पूर्व दिग्गज कप्तान रिकी पोंटिंग ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक स्पोर्ट्स चैनल से बात करते हुए पोंटिंग ने कहा:
“यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे खराब सफेद गेंद अभियान (White Ball Campaign) है। हम बहाने नहीं बना सकते। जब आप जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसी टीमों से हार जाते हैं, तो आप वर्ल्ड कप जीतने के हकदार नहीं होते। टीम के चयन से लेकर मैदान पर रणनीति तक, सब कुछ दिशाहीन था।”
जिम्बाब्वे का स्वर्णिम युग: ‘जायंट किलर’ की वापसी
दूसरी ओर, जिम्बाब्वे के लिए यह जश्न का समय है। पिछले कुछ वर्षों में जिम्बाब्वे क्रिकेट ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इस वर्ल्ड कप में उन्होंने खुद को ‘जायंट किलर’ साबित किया है। कप्तान सिकंदर रजा के नेतृत्व में टीम ने जिस अनुशासन और जज्बे के साथ क्रिकेट खेला है, उसकी तारीफ हर जगह हो रही है। पहली बार सुपर-8 में पहुंचना जिम्बाब्वे क्रिकेट के पुनरुद्धार का संकेत है।
आगे क्या?
ऑस्ट्रेलियाई टीम अब स्वदेश वापसी की तैयारी करेगी, जहाँ चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ पर बड़े बदलावों का दबाव होगा। वहीं, सुपर-8 में जिम्बाब्वे का मुकाबला अब भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों से होगा। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह वर्ल्ड कप अब और भी रोमांचक हो गया है क्योंकि एक ‘अंडरडॉग’ टीम ने खिताब की दौड़ को पूरी तरह से खुला छोड़ दिया है।