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चैंपियंस ट्रॉफी: वेन्यू पर ‘डेडलॉक’ बरकरार, क्या ‘हाइब्रिड मॉडल’ ही बनेगा आखिरी रास्ता?

दुबई/नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में ‘मिनी वर्ल्ड कप’ के नाम से मशहूर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर अनिश्चितता के बादल गहरे होते जा रहे हैं। टूर्नामेंट की मेजबानी और वेन्यू (स्थान) को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC), भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच चल रही खींचतान ने खेल प्रेमियों को सस्पेंस में डाल दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर मेजबानी पाकिस्तान के पास है, लेकिन भारतीय टीम के वहां न जाने के अडिग रुख ने आईसीसी को धर्मसंकट में डाल दिया है।

विवाद की जड़: सुरक्षा और राजनीतिक तनाव

चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन को लेकर मुख्य विवाद भारत के पाकिस्तान दौरे को लेकर है। बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत सरकार से अनुमति न मिलने के कारण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए टीम इंडिया पाकिस्तान की यात्रा नहीं करेगी। दूसरी ओर, पीसीबी का तर्क है कि जब अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय टीमें (ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका) पाकिस्तान में खेल रही हैं, तो केवल भारत को ही सुरक्षा की समस्या क्यों है? पाकिस्तान ने इस बार किसी भी तरह के ‘हाइब्रिड मॉडल’ को स्वीकार न करने की धमकी दी है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।

क्या है ‘हाइब्रिड मॉडल’ का प्रस्ताव?

आईसीसी ने विवाद सुलझाने के लिए ‘हाइब्रिड मॉडल’ का सुझाव दिया है, जैसा कि पिछली बार एशिया कप के दौरान देखा गया था। इस मॉडल के तहत:

  • पाकिस्तान: टूर्नामेंट के अधिकांश मैचों की मेजबानी करेगा।

  • न्यूट्रल वेन्यू: भारत के सभी मैच, सेमीफाइनल (यदि भारत पहुँचता है) और फाइनल मुकाबला किसी न्यूट्रल स्थान पर आयोजित किए जा सकते हैं।

  • संभावित देश: न्यूट्रल वेन्यू के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) या श्रीलंका के नाम सबसे आगे हैं। दुबई और शारजाह के स्टेडियमों को आईसीसी ने ‘स्टैंडबाय’ मोड पर रखने के संकेत दिए हैं।

आईसीसी की आगामी बैठक और ‘मेगा रेवेन्यू’ का दबाव

आईसीसी की अगली बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। परिषद के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय नुकसान को रोकना है। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला आईसीसी के लिए सबसे ज्यादा राजस्व (Revenue) पैदा करने वाला मैच होता है। यदि भारत इस टूर्नामेंट से हटता है या पाकिस्तान मेजबानी छोड़ता है, तो ब्रॉडकास्टर्स और प्रायोजकों को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार: > आईसीसी का बोर्ड यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि टूर्नामेंट का आयोजन ऐसा हो जहाँ भारत और पाकिस्तान कम से कम एक बार भिड़ें। इसके लिए दुबई को सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है क्योंकि वहां का बुनियादी ढांचा और भारतीय उपमहाद्वीप के फैंस की पहुँच सबसे बेहतर है।

खिलाड़ियों और फैंस की बेकरारी

इस अनिश्चितता का असर खिलाड़ियों की तैयारी पर भी पड़ रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी आठ साल बाद वापसी कर रही है, और डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में पाकिस्तान और हालिया विश्व कप प्रदर्शन के साथ भारत, दोनों ही टीमें खिताब की प्रबल दावेदार हैं। फैंस के लिए यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मैदान पर होने वाली श्रेष्ठता की जंग है।

निष्कर्ष: समाधान की उम्मीद

चैंपियंस ट्रॉफी का भविष्य अब खेल के मैदान से ज्यादा ‘बोर्ड रूम’ की चर्चाओं पर निर्भर है। यदि पाकिस्तान हाइब्रिड मॉडल के लिए राजी होता है, तो टूर्नामेंट सुचारू रूप से चल सकेगा। लेकिन यदि गतिरोध बना रहा, तो आईसीसी को मेजबानी किसी तीसरे देश (जैसे दक्षिण अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया) को सौंपने का कड़ा फैसला भी लेना पड़ सकता है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️