
भारतीय खेल जगत के लिए वर्तमान समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में संपन्न हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक क्वालीफायर आयोजनों में भारतीय एथलीटों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल एक ‘क्रिकेट प्रेमी राष्ट्र’ नहीं, बल्कि एक बहु-विषयक खेल शक्ति (Multi-sport powerhouse) बनने की ओर अग्रसर है। ट्रैक एंड फील्ड से लेकर कुश्ती के अखाड़े तक, तिरंगा हर जगह शान से लहरा रहा है।
नीरज चोपड़ा: गोल्डन बॉय की अटूट फॉर्म
जब भी भारतीय एथलेटिक्स की बात होती है, नीरज चोपड़ा का नाम सबसे ऊपर आता है। ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने क्वालीफायर्स में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में ओलंपिक क्वालीफिकेशन मानक को पार करते हुए आगामी प्रमुख टूर्नामेंटों के लिए अपनी जगह सुरक्षित कर ली। उनकी निरंतरता और 89-90 मीटर के क्षेत्र में लगातार भाला फेंकने की क्षमता ने उन्हें पदक का सबसे बड़ा दावेदार बना दिया है। नीरज की सफलता ने न केवल अन्य भाला फेंकने वालों (जैसे किशोर जेना) को प्रेरित किया है, बल्कि पूरे एथलेटिक्स दल में एक नया आत्मविश्वास फूँक दिया है।
ट्रैक एंड फील्ड: दौड़ और छलांग में नया इतिहास
ट्रैक एंड फील्ड में भारत का प्रदर्शन इस बार अभूतपूर्व रहा है। अविनाश साबले (स्टीपलचेज) ने अपनी लय बरकरार रखी है, जबकि लंबी कूद (Long Jump) और त्रिकूद (Triple Jump) में भी भारतीय एथलीटों ने पेरिस के बाद अपनी फॉर्म को और निखारा है। विशेष रूप से 4×400 मीटर रिले टीम ने अपनी टाइमिंग में सुधार करते हुए वैश्विक स्तर पर शीर्ष टीमों को चुनौती देना शुरू कर दिया है। स्प्रिंटिंग में भी भारतीय युवाओं ने एशियाई रिकॉर्ड्स को चुनौती दी है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय एथलीट अब केवल भाग लेने के लिए नहीं, बल्कि जीतने के लिए मैदान में उतर रहे हैं।
कुश्ती: अखाड़े में भारतीय शेरों की वापसी
कुश्ती हमेशा से भारत के लिए ओलंपिक में पदकों की उम्मीद रही है। हालिया क्वालीफायर्स में भारतीय पहलवानों ने तकनीकी श्रेष्ठता और गजब की फुर्ती का प्रदर्शन किया। अमन सहरावत और अंतिम पंघाल जैसे युवा पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय मैट पर अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों को हराकर कोटा हासिल किया है। कुश्ती में भारत की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय में प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद खिलाड़ियों ने अपना ध्यान खेल पर केंद्रित रखा और विश्व स्तर पर अपनी रैंकिंग में सुधार किया।
निशानेबाजी और अन्य खेल
एथलेटिक्स और कुश्ती के अलावा, भारतीय निशानेबाजों (Shooters) ने भी क्वालीफाइंग राउंड में अपना दबदबा कायम रखा है। 10 मीटर एयर राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं में भारतीय दल ने रिकॉर्ड संख्या में कोटा हासिल किए हैं। साथ ही, बैडमिंटन में लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु की जोड़ी एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है।
निष्कर्ष: एक नए भारत का उदय
इन क्वालीफायर्स के परिणाम बताते हैं कि भारत सरकार की ‘टॉप्स’ (TOPS) योजना और खेलो इंडिया जैसे अभियानों का जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। एथलीटों को अब विश्व स्तरीय कोचिंग, विदेशी प्रशिक्षण शिविर और बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं। नीरज चोपड़ा जैसे आदर्शों के होने से युवाओं में यह विश्वास जगा है कि वे दुनिया के किसी भी कोने में जाकर स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।
यदि यह फॉर्म जारी रही, तो आगामी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़कर एक नया इतिहास रचने की राह पर है।