
नई दिल्ली/नागोया, 11 मार्च 2026: भारतीय खेल जगत अब एक नए और बड़े सपने की ओर कदम बढ़ा चुका है। हांगझोऊ एशियाई खेलों में 107 पदकों का ऐतिहासिक आंकड़ा छूने के बाद, भारत ने अब जापान के आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियाई खेलों (Asian Games 2026) के लिए अपनी कमर कस ली है। खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार केवल प्रतिभाग करने के लिए नहीं, बल्कि महाद्वीप में अपनी खेल शक्ति को स्थापित करने के लिए ‘मिशन 100+’ का रोडमैप तैयार किया है।
उच्च स्तरीय समीक्षा और ‘मिशन 100+’ का लक्ष्य
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने हाल ही में खेल प्राधिकरण (SAI) और विभिन्न खेल संघों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत के प्रदर्शन को पिछले रिकॉर्ड से भी ऊपर ले जाना था।
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700+ एथलीटों का विशाल दल: सरकार ने इस बार अब तक का सबसे बड़ा दल भेजने की योजना बनाई है। उम्मीद है कि भारत की ओर से 700 से अधिक एथलीट जापान जाएंगे।
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टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए ‘टॉप्स’ योजना के तहत खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, डाइट और विदेशी कोचों पर निवेश बढ़ा दिया गया है।
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रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी: पिछला रिकॉर्ड 107 मेडल (28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य) का था। इस बार खेल मंत्रालय का अनौपचारिक लक्ष्य 125 से 130 पदकों के बीच है।
AFI के कड़े मानक: केवल सर्वश्रेष्ठ को ही मिलेगा मौका
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने इस बार चयन प्रक्रिया में कोई ढील न देने का फैसला किया है। महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि एशियाई खेलों का टिकट केवल उन्हीं को मिलेगा जो वैश्विक मानकों पर खरे उतरेंगे।
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नेशनल रिकॉर्ड से मुकाबला: 100 मीटर और 200 मीटर जैसी ट्रैक स्पर्धाओं में क्वालिफिकेशन मार्क इतने ऊंचे रखे गए हैं कि खिलाड़ियों को अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ या राष्ट्रीय रिकॉर्ड के करीब प्रदर्शन करना होगा।
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नीरज चोपड़ा और किशोर जेना: जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में भारत को एक बार फिर स्वर्ण और रजत की उम्मीद है। नीरज चोपड़ा की अगुवाई में एथलेटिक्स दल अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए पसीना बहा रहा है।
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रिले टीमें: भारत की 4×400 मीटर पुरुष और महिला रिले टीमों के लिए विशेष कैंप लगाए गए हैं, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र में एशियाई स्तर पर दबदबा बनाया है।
किन खेलों पर रहेगी विशेष नजर?
जापान में होने वाले इन खेलों में भारत की नजरें कुछ पारंपरिक और कुछ नए खेलों पर टिकी हैं:
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निशानेबाजी (Shooting): हांगझोऊ की तरह इस बार भी शूटिंग दल से सर्वाधिक पदकों की उम्मीद है।
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कुश्ती और मुक्केबाजी: हालिया विवादों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय पहलवान और मुक्केबाज रिंग में अपनी धाक जमाने को तैयार हैं।
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क्रिकेट: टी20 वर्ल्ड कप की जीत के बाद, एशियाई खेलों में पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों से ‘गोल्ड’ की अपेक्षा और बढ़ गई है।
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तीरंदाजी (Archery): कंपाउंड और रिकर्व स्पर्धाओं में भारतीय तीरंदाज वर्तमान में विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर हैं।
चुनौतियां और तैयारी
जापान की परिस्थितियां चीन या भारत से भिन्न हो सकती हैं। वहां की नमी और हवा के रुख को समझने के लिए भारतीय एथलीटों को खेलों से एक महीने पहले ही जापान भेजने का प्रस्ताव है ताकि वे वहां के वातावरण के अनुकूल खुद को ढाल सकें।
निष्कर्ष: ‘मिशन 100+’ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती खेल संस्कृति का प्रतीक है। जिस तरह से सरकार और खेल संघ मिलकर काम कर रहे हैं, उससे यह निश्चित प्रतीत होता है कि सितंबर 2026 में जब जापान के नागोया में खेल शुरू होंगे, तो भारत पदक तालिका में अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल करने की कोशिश करेगा।