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एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप: पीवी सिंधु का ‘सुपर’ प्रदर्शन, जापानी चुनौती को ध्वस्त कर सेमीफाइनल में बनाई जगह

निन्बो (चीन)। भारतीय बैडमिंटन की पोस्टर गर्ल पीवी सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा बुलंद किया है। चीन में खेली जा रही प्रतिष्ठित एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के महिला एकल वर्ग में सिंधु ने अपनी चिर-परिचित आक्रामकता का परिचय देते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। क्वार्टर फाइनल के एक बेहद रोमांचक और रणनीतिक मुकाबले में सिंधु ने जापान की दिग्गज खिलाड़ी को सीधे सेटों में 21-15, 21-18 से शिकस्त देकर पदक की ओर अपना कदम बढ़ा दिया है।

मैच का विवरण: रणनीति और स्मैश का संगम

मुकाबले की शुरुआत से ही पीवी सिंधु काफी लय में नजर आईं। पहले गेम में उन्होंने जापानी खिलाड़ी को कोर्ट के चारों कोनों पर दौड़ाया। सिंधु के क्रॉस-कोर्ट स्मैश और नेट के करीब उनकी चपलता का प्रतिद्वंद्वी के पास कोई जवाब नहीं था।

  • पहला गेम (21-15): सिंधु ने शुरुआत में ही 11-7 की बढ़त बना ली थी। ब्रेक के बाद उन्होंने अपनी लीड को बरकरार रखा और लंबी रैलियों में धैर्य दिखाते हुए पहला गेम आसानी से 21-15 से अपने नाम कर लिया।

  • दूसरा गेम (21-18): दूसरे गेम में जापानी खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की कोशिश की। एक समय स्कोर 15-15 की बराबरी पर था और मुकाबला किसी भी ओर झुक सकता था। यहाँ सिंधु के अनुभव ने काम किया। उन्होंने बॉडी स्मैश का चतुराई से उपयोग किया और अंतिम क्षणों में लगातार तीन अंक बटोरकर गेम और मैच दोनों अपनी झोली में डाल लिए।

लक्ष्य सेन की दहाड़: पुरुष एकल में भी उम्मीदें बरकरार

सिंधु की इस जीत के साथ ही भारत के युवा सनसनी लक्ष्य सेन ने भी पुरुष एकल के अगले दौर में पहुँचकर भारतीय खेमे में जोश भर दिया है। लक्ष्य ने अपनी गति और रक्षात्मक खेल के दम पर शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों में से एक को मात दी। लक्ष्य और सिंधु की ये जीतें दर्शाती हैं कि भारतीय बैडमिंटन अब केवल एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है, बल्कि युवा ब्रिगेड भी विश्व स्तर पर दबदबा बनाने के लिए तैयार है।

स्वर्ण पदक की ओर कदम

पीवी सिंधु ने इस जीत के साथ कम से कम कांस्य पदक तो पक्का कर लिया है, लेकिन उनकी नजरें अब स्वर्ण पदक पर टिकी हैं। सिंधु ने पिछली कुछ प्रतियोगिताओं में चोट के कारण संघर्ष किया था, लेकिन इस चैंपियनशिप में उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती लौटती दिख रही है।

सिंधु का बयान: > “मैं अपनी लय और कोर्ट पर अपनी मूवमेंट से खुश हूँ। सेमीफाइनल का मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन मैं पूरी तरह तैयार हूँ। लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि गोल्ड के साथ घर लौटना है।”

आगामी चुनौती: सेमीफाइनल की जंग

सेमीफाइनल में सिंधु का सामना चीन या दक्षिण कोरिया की शीर्ष वरीय खिलाड़ी से हो सकता है। एशियाई चैंपियनशिप को बैडमिंटन की दुनिया में ‘मिनी वर्ल्ड चैंपियनशिप’ कहा जाता है क्योंकि एशिया के लगभग सभी खिलाड़ी विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर हैं। ऐसे में सिंधु को अपनी अनफोर्स्ड एरर्स (बिना दबाव के होने वाली गलतियां) पर नियंत्रण रखना होगा।

भारतीय बैडमिंटन के लिए क्या हैं मायने?

यह जीत न केवल सिंधु के आत्मविश्वास के लिए जरूरी थी, बल्कि 2026 के एशियाई खेलों और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। सिंधु की वापसी भारतीय खेलों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि वे बड़े आयोजनों में भारत की सबसे बड़ी ‘बिग मैच प्लेयर’ मानी जाती हैं।


निष्कर्ष

पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन के इस दोहरे धमाके ने भारतीय फैंस की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुँचा दी हैं। देश को उम्मीद है कि 21 फरवरी का यह शानदार प्रदर्शन आने वाले फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक में तब्दील होगा।

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