
बिश्केक (किर्गिस्तान)। एशियाई कुश्ती के सबसे बड़े मंच पर भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में से क्यों गिने जाते हैं। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में खेली जा रही एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में भारत के सुजीत कलकल और अभिमन्यु मंडवाल ने अपने-अपने भार वर्ग में प्रतिद्वंद्वी पहलवानों को धूल चटाते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर कब्जा जमाया। इनके अलावा, महिला वर्ग में मीनाक्षी गोयत ने भी अपने जुझारू प्रदर्शन से रजत पदक हासिल कर भारत का मान बढ़ाया।
सुजीत कलकल: 65 किग्रा वर्ग में नया ‘किंग’
भारत के उभरते हुए सितारे सुजीत कलकल ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में अपनी तकनीक और चपलता से सबको प्रभावित किया। फाइनल मुकाबले में सुजीत का सामना एक बेहद मजबूत उज्बेकिस्तान के पहलवान से था।
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मैच का रोमांच: सुजीत ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पहले राउंड में ही महत्वपूर्ण अंक हासिल कर लिए। दूसरे राउंड में जब प्रतिद्वंद्वी ने वापसी की कोशिश की, तो सुजीत ने बेहतरीन डिफेंस दिखाते हुए अपने अंकों की बढ़त को बनाए रखा। अंत में, उन्होंने तकनीकी श्रेष्ठता और चतुराई भरे मूव्स के जरिए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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महत्व: सुजीत की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि 65 किग्रा वर्ग हमेशा से कुश्ती में सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है, और इस जीत ने उन्हें आगामी विश्व प्रतियोगिताओं के लिए पदक का प्रबल दावेदार बना दिया है।
अभिमन्यु मंडवाल: 70 किग्रा में पावरफुल प्रदर्शन
70 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में अभिमन्यु मंडवाल ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान एकतरफा दबदबा बनाए रखा। उनके शारीरिक बल और सटीक ‘लेग अटैक’ का जवाब किसी भी विपक्षी पहलवान के पास नहीं था।
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स्वर्ण पदक का सफर: फाइनल में अभिमन्यु ने मेजबान किर्गिस्तान के पहलवान को मात दी, जिन्हें घरेलू दर्शकों का पूरा समर्थन हासिल था। शोर-शराबे के बीच अभिमन्यु ने अपना संयम बनाए रखा और अंतिम मिनटों में ‘टेकडाउन’ के जरिए अंक बटोरते हुए भारत के लिए दिन का दूसरा स्वर्ण सुनिश्चित किया।
मीनाक्षी गोयत: रजत पदक के साथ चमक
महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में भारत की मीनाक्षी गोयत ने भी शानदार प्रदर्शन किया। मीनाक्षी फाइनल तक का सफर तय करने में सफल रहीं, जहाँ उनका मुकाबला एक अनुभवी जापानी पहलवान से हुआ। हालांकि मीनाक्षी स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन उनके द्वारा जीता गया रजत पदक (Silver Medal) उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह की ‘ग्रिट’ दिखाई, उसकी खेल विशेषज्ञों ने जमकर तारीफ की है।
भारतीय कुश्ती के लिए बड़े संकेत
बिश्केक में भारतीय पहलवानों का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह जीत दर्शाती है कि भारतीय कुश्ती अब केवल एक या दो भार वर्गों पर निर्भर नहीं है, बल्कि हमारे पास हर वर्ग में विश्व स्तरीय प्रतिभा मौजूद है। सुजीत और अभिमन्यु जैसे युवाओं का उदय भारतीय कुश्ती के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
खेल मंत्रालय और संघ की प्रतिक्रिया
भारत सरकार के खेल मंत्रालय और भारतीय कुश्ती संघ ने विजेताओं को बधाई देते हुए उनके लिए विशेष प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है। प्रधानमंत्री और खेल मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन पहलवानों की मेहनत और लगन की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन से अन्य युवा पहलवानों को भी प्रेरणा मिलेगी और कुश्ती के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह और बढ़ेगा।
निष्कर्ष
एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में भारत का यह अभियान अब तक बेहद सफल रहा है। सुजीत कलकल और अभिमन्यु मंडवाल की स्वर्णिम सफलता ने देश को गौरवान्वित किया है, वहीं मीनाक्षी गोयत के रजत पदक ने महिला कुश्ती की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया है। बिश्केक के मैट पर तिरंगा लहराते देखना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। अब नजरें प्रतियोगिता के आगामी दिनों और अन्य भार वर्गों पर टिकी हैं, जहाँ भारत को और भी पदकों की उम्मीद है।