
भारतीय एथलेटिक्स के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। चीन के तियानजिन में आयोजित एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर कब्जा जमाया है। उनकी इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलेटिक्स के बढ़ते दबदबे को एक बार फिर रेखांकित किया है।
तेजस्विन शंकर का ‘गोल्डन’ जंप
तेजस्विन शंकर, जो ऊंची कूद (High Jump) और डिकैथलॉन में भारत के प्रमुख चेहरा हैं, ने प्रतियोगिता के दौरान शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने शानदार तकनीक और मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक जीता।
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प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं: तेजस्विन ने ऊँची कूद स्पर्धा में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। चीन और जापान के एथलीटों से मिली कड़ी टक्कर के बावजूद, शंकर ने निर्णायक जंप के समय अपनी लय बरकरार रखी।
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बहुमुखी प्रतिभा: तेजस्विन की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इंडोर और आउटडोर दोनों ही तरह की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए लगातार पदक जीत रहे हैं।
भारतीय दल का प्रदर्शन: पदक तालिका में छठा स्थान
इस चैंपियनशिप में भारतीय दल ने कुल 5 पदक अपने नाम किए। इन पदकों में स्वर्ण के साथ-साथ रजत और कांस्य पदक भी शामिल हैं। हालांकि भारत पदक तालिका (Medal Standings) में छठे स्थान पर रहा, लेकिन एथलीटों के व्यक्तिगत प्रदर्शन ने भविष्य के लिए बड़ी उम्मीदें जगाई हैं।
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स्वर्ण पदक: तेजस्विन शंकर (ऊँची कूद)।
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अन्य पदक: लंबी कूद (Long Jump) और शॉट पुट (Shot Put) स्पर्धाओं में भी भारतीय एथलीटों ने कड़े मुकाबले में पदक हासिल किए।
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कड़ी प्रतिस्पर्धा: चैंपियनशिप में चीन, कजाकिस्तान और जापान जैसे देशों का दबदबा रहा, जो पारंपरिक रूप से इंडोर एथलेटिक्स में बहुत मजबूत माने जाते हैं।
एशियन इंडोर चैंपियनशिप का महत्व
इंडोर एथलेटिक्स, आउटडोर प्रतियोगिताओं से काफी अलग और चुनौतीपूर्ण होती है। यहाँ हवा का दबाव कम होता है और ट्रैक की बनावट अलग होती है। तेजस्विन शंकर की यह जीत दर्शाती है कि भारतीय एथलीट अब हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार हैं।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने इस जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता आगामी एशियाई खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहतरीन तैयारी है। शंकर की जीत ने न केवल देश का मान बढ़ाया है, बल्कि युवा एथलीटों को भी प्रेरित किया है।
निष्कर्ष
तेजस्विन शंकर अब भारत के सबसे भरोसेमंद एथलीटों में से एक बन गए हैं। तियानजिन में उनके स्वर्ण पदक ने यह साबित कर दिया है कि सही प्रशिक्षण और समर्पण से भारतीय एथलीट दुनिया के किसी भी कोने में तिरंगा फहरा सकते हैं। अब सबकी नजरें तेजस्विन के अगले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट पर हैं, जहाँ वे अपने इस प्रदर्शन को और बेहतर करने का प्रयास करेंगे।