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उस्मान ख्वाजा का संन्यास: एक ‘क्लासिक’ युग का समापन, जिसने क्रिकेट की परिभाषा को फिर से लिखा

सिडनी: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट प्रेमियों के लिए आज का दिन भावुक कर देने वाला है। शानदार तकनीक, धैर्य और कलाई के जादूगर कहे जाने वाले उस्मान ख्वाजा ने क्रिकेट की पिच को अलविदा कह दिया है। ख्वाजा ने अपनी संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि वे अपने करियर के इस मुकाम पर पहुंचकर संतुष्ट हैं और अब समय आ गया है कि अगली पीढ़ी को मौका दिया जाए।

आंकड़ों में एक महान करियर

ख्वाजा का टेस्ट करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उन्होंने जब भी वापसी की, पहले से बेहतर प्रदर्शन किया। उनके करियर के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

फॉर्मेट मैच रन औसत शतक सर्वोच्च स्कोर
टेस्ट 87 6,206 43.39 16 195*
वनडे 40 1,554 42.00 2 104
टी20 9 241 26.77 0 58

ख्वाजा के नाम 16 टेस्ट शतक और 28 अर्धशतक दर्ज हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता क्रीज पर घंटों खड़े रहने की क्षमता थी, जिसने आधुनिक क्रिकेट के दौर में भी ‘क्लासिक टेस्ट बल्लेबाजी’ को जीवित रखा।

संघर्ष और शानदार ‘सेकंड इनिंग्स’

उस्मान ख्वाजा का करियर केवल रनों के बारे में नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और वापसी की कहानी भी है। पाकिस्तान में जन्मे ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर बने। साल 2011 में डेब्यू करने के बाद उन्हें कई बार टीम से बाहर किया गया।

2019 से 2021 के बीच वह करीब दो साल तक टीम से बाहर रहे, लेकिन 2022 में एशेज के दौरान सिडनी टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में शतक लगाकर जो वापसी की, उसने इतिहास रच दिया। 2022 और 2023 के दौरान वे दुनिया के सबसे सफल टेस्ट ओपनर बनकर उभरे और ICC टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर की रेस में भी शामिल रहे।

एशेज और भारत के खिलाफ यादगार पारियां

ख्वाजा को उनके ‘उपमहाद्वीपीय’ कौशल के लिए जाना जाता था। उन्होंने भारत के खिलाफ अहमदाबाद (2023) में शानदार 180 रनों की पारी खेली थी। वहीं, इंग्लैंड की धरती पर 2023 की एशेज सीरीज में उनकी बल्लेबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को खिताब बचाने में मदद की। वे स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों को समान कौशल के साथ खेलने की कला में माहिर थे।

मैदान से बाहर का व्यक्तित्व

उस्मान ख्वाजा केवल एक महान बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि एक मुखर व्यक्तित्व भी रहे हैं। उन्होंने सामाजिक मुद्दों और मानवाधिकारों पर हमेशा अपनी राय रखी। वे एक लाइसेंस प्राप्त कमर्शियल पायलट भी हैं, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए आगे की चुनौती

डेविड वॉर्नर के बाद अब उस्मान ख्वाजा के संन्यास से ऑस्ट्रेलिया के सामने एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। टीम को अब दो नए सलामी बल्लेबाजों की तलाश करनी होगी। मार्कस हैरिस, कैमरून बैनक्रॉफ्ट और मैट रेनशॉ जैसे खिलाड़ियों के बीच अब इस खाली जगह को भरने की होड़ लगेगी।

उस्मान ख्वाजा का जाना क्रिकेट के उस पारंपरिक स्वरूप की विदाई जैसा है, जहाँ संयम और तकनीक को आक्रामकता से ऊपर रखा जाता था। क्रिकेट जगत उन्हें एक ऐसे योद्धा के रूप में याद रखेगा जिसने कभी हार नहीं मानी।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️