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💔 मनोवैज्ञानिक अध्ययन: ‘अधूरी अपेक्षाएं’ और ‘अहंकार’ बन रहे रिश्ते टूटने की सबसे बड़ी वजह

नई दिल्ली। 21 नवंबर 2025।

रिश्तों के टूटने की बढ़ती दर और इसके पीछे के गहरे कारणों को समझने के लिए किए गए एक नए मनोवैज्ञानिक अध्ययन ने समाज को झकझोर कर रख देने वाला खुलासा किया है। यह अध्ययन बताता है कि जहाँ विश्वास (Trust) और संचार (Communication) की कमी हमेशा से रिश्ते बिगड़ने के मुख्य कारक रहे हैं, वहीं आधुनिक रिश्तों को खत्म करने वाले दो सबसे बड़े उत्प्रेरक (Catalyst) हैं: अधूरी अपेक्षाएं (Unmet Expectations) और अहंकार (Ego)

🎯 अपेक्षाओं का बोझ: जब उम्मीदें हकीकत से बड़ी हों

 

अध्ययन में पाया गया कि कई रिश्ते भावनात्मक रूप से तब टूटना शुरू होते हैं जब साथी एक-दूसरे से अवास्तविक और अत्यधिक उम्मीदें पाल लेते हैं। आज के दौर में, सोशल मीडिया और फिल्मों के ‘परफेक्ट पार्टनर’ की छवि ने लोगों की अपेक्षाओं को आसमान तक पहुंचा दिया है।

  • परिणाम: जब साथी उन ‘परफेक्ट’ मानकों को पूरा करने में विफल रहते हैं—चाहे वह आर्थिक हो, भावनात्मक हो या सामाजिक—तो रिश्ते में कड़वाहट, निराशा और असंतोष जन्म लेता है। यह निराशा धीरे-धीरे प्यार और सम्मान की जगह ले लेती है।

  • विशेषज्ञ की टिप्पणी: शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अपेक्षाएं रखना स्वाभाविक है, लेकिन जब वे अस्पष्ट, अनकही या अत्यधिक मांग वाली हो जाती हैं, तो वे रिश्ते पर एक अदृश्य बोझ डालती हैं। हर व्यक्ति पूर्ण नहीं होता और अपेक्षाएं पालने से बेहतर है कि साथी को उसकी खामियों के साथ स्वीकार किया जाए।

😠 अहंकार की दीवार: बातचीत का रुक जाना

 

रिश्ते टूटने का दूसरा सबसे घातक कारण है अहंकार (Ego)। अध्ययन के अनुसार, अहंकार अक्सर छोटी-छोटी गलतफहमियों और झगड़ों को बड़े संकट में बदल देता है।

  • चुप रहने की प्रवृत्ति: जब झगड़े होते हैं, तो अहंकार दोनों साथियों को झुकने, माफी मांगने या सबसे पहले बात करने से रोकता है। यह ‘कौन सही है’ की लड़ाई बन जाती है, न कि ‘रिश्ते को कैसे बचाया जाए’ की।

  • बातचीत का अंत: यह अहंकार अंततः बातचीत को पूरी तरह से बंद करा देता है, जिससे भावनात्मक दूरी बढ़ती जाती है। रिश्ते में संचार की कमी हो जाती है और समाधान की कोई गुंजाइश नहीं बचती, जिसके कारण कई रिश्ते तलाक के अंतिम चरण तक पहुँच जाते हैं।

✅ विशेषज्ञ की सलाह: कर्तव्य निभाना, अपेक्षा रखने से बेहतर

 

मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि एक मजबूत और स्वस्थ रिश्ते के लिए, लोगों को अपेक्षा रखने की मानसिकता (Expectation Mindset) को त्यागकर कर्तव्य निभाने की मानसिकता (Duty Mindset) अपनानी चाहिए।

  • कर्तव्य पर ध्यान दें: बजाय इसके कि आप अपने साथी से क्या चाहते हैं, इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि आप अपने साथी को क्या दे सकते हैं—जैसे कि सम्मान, समर्थन, स्नेह और वफादारी।

  • कम्युनिकेशन को प्राथमिकता दें: अहंकार को रिश्ते से ऊपर न रखें। असहमति होने पर भी बातचीत को बंद न करें और अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, जिससे गलतफहमियाँ पैदा न हों।

इस अध्ययन का सार यह है कि वास्तविक प्रेम तब फलता-फूलता है जब दोनों साथी एक-दूसरे की सीमाओं को समझते हैं और एक-दूसरे को बदलने की कोशिश किए बिना समानता से सम्मान करते हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️