
मुंबई/बेंगलुरु, भारत। (28 अक्टूबर, 2025)
आधुनिक भारतीय समाज में विवाह और रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा अब तेजी से बदल रही है। एक नया सामाजिक ट्रेंड जो धीरे-धीरे मेट्रो शहरों के शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र कपल्स के बीच अपनी जड़ें जमा रहा है, वह है ‘लिविंग अपार्ट टुगेदर’ (Living Apart Together – LAT)।
LAT वह व्यवस्था है जहाँ कपल कानूनी रूप से शादीशुदा होते हैं और एक गहरा भावनात्मक बंधन साझा करते हैं, लेकिन अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर ज़रूरतों के कारण वे अलग-अलग घरों या शहरों में रहना चुनते हैं। यह कॉन्सेप्ट उन जोड़ों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है जो एक-दूसरे के प्रति कमिटेड हैं, लेकिन अपनी पहचान, करियर की ज़रूरतों और निजी स्पेस को विवाह के लिए कुर्बान नहीं करना चाहते।
LAT क्यों हो रहा है लोकप्रिय?
इस नए सामाजिक ट्रेंड के लोकप्रिय होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- करियर की प्राथमिकता: आईटी, बैंकिंग, या मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले कई प्रोफेशनल्स को अक्सर अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग मिलती है। LAT उन्हें रिश्ते को बनाए रखते हुए अपने करियर के लक्ष्यों को पूरा करने की आज़ादी देता है।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता: आधुनिक कपल्स अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और ‘मी-टाइम’ को महत्व देते हैं। अलग रहने से वे अपने शौक, दोस्त और जीवनशैली बिना किसी समझौते के जी पाते हैं, जिससे रिश्ते में बोरियत या घुटन कम होती है।
- बच्चों पर कम दबाव: कुछ कपल LAT को इसलिए चुनते हैं क्योंकि उनके पहले रिश्ते से बच्चे होते हैं। अलग रहने से बच्चों पर नए पार्टनर को तुरंत स्वीकार करने का दबाव कम होता है।
- रिश्ते में ‘स्पार्क’ बनाए रखना: कई मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि थोड़ी दूरी रिश्ते में उत्साह और रोमांस को बनाए रखने में मदद करती है, क्योंकि मिलने का समय खास बन जाता है।
पारंपरिक विवाह को चुनौती
LAT का चलन आधुनिक भारतीय समाज में विवाह की उस पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है, जहाँ एक ही छत के नीचे रहना रिश्ते की सफलता की पहली शर्त मानी जाती थी। यह दिखाता है कि आज के कपल्स भावनात्मक जुड़ाव को भौगोलिक समीपता से अधिक महत्व दे रहे हैं।
समाजशास्त्री इस ट्रेंड को बढ़ती व्यक्तिवाद (Individualism) और आर्थिक आत्मनिर्भरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं, खासकर महिलाओं के बीच। आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएँ अब एक ऐसे रिश्ते की मांग कर रही हैं जहाँ उन्हें सिर्फ ‘पत्नी’ की नहीं, बल्कि एक ‘व्यक्ति’ की पहचान भी मिले।
हालांकि, LAT को अभी भी समाज के एक बड़े तबके द्वारा संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, जहाँ रिश्ते की सफलता को अक्सर ‘साथ रहने’ से जोड़ा जाता है। लेकिन, LAT कपल्स का मानना है कि उनकी व्यवस्था रिश्ते में पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित है, जो इसे और अधिक मजबूत बनाती है।