
नई दिल्ली। (28 अक्टूबर, 2025)
दिल्ली हाई कोर्ट एक ऐसे ऐतिहासिक मामले की सुनवाई कर रहा है, जो भारत में वैवाहिक संबंधों में धोखे से जुड़े कानूनी प्रावधानों को हमेशा के लिए बदल सकता है। यह मामला एक विवाहित महिला द्वारा अपने पति की प्रेमिका के खिलाफ दायर किया गया है, जिसमें उसने अदालत से ‘एलीनेशन ऑफ अफेक्शन’ (Alienation of Affection) के आधार पर क्षतिपूर्ति (Damages) की मांग की है।
कानूनी लड़ाई का आधार: ‘एलीनेशन ऑफ अफेक्शन’
याचिकाकर्ता पत्नी का आरोप है कि उसके पति की प्रेमिका ने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से उनकी शादी को तोड़ दिया। उसका तर्क है कि प्रेमिका के हस्तक्षेप के कारण ही उसका पति उससे अलग हुआ, जिससे उसे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से अपूरणीय क्षति हुई है।
‘एलीनेशन ऑफ अफेक्शन’ का सिद्धांत मूल रूप से अमेरिकी और ब्रिटिश कानून में पाया जाता था, जिसके तहत पीड़ित पति या पत्नी अपने जीवनसाथी को बहकाने या शादी तोड़ने वाले तीसरे व्यक्ति पर मुकदमा कर सकते थे। भारत में, व्यभिचार (Adultery) को पहले एक आपराधिक अपराध माना जाता था, लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालाँकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि यह अभी भी तलाक का आधार बन सकता है।
मौजूदा मामले में, पत्नी तलाक से आगे बढ़कर, उस तीसरे व्यक्ति से वित्तीय हर्जाना मांग रही है जिसने जानबूझकर उनके वैवाहिक बंधन को तोड़ा।
एक संभावित ऐतिहासिक फैसला
अगर दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाता है और प्रेमिका को हर्जाना देने का आदेश देता है, तो यह भारतीय कानूनी इतिहास में एक नया मानदंड (Precedent) स्थापित करेगा।
- बदलाव का संकेत: यह फैसला संकेत देगा कि व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से हटाए जाने के बाद भी, वैवाहिक संबंधों में जानबूझकर हस्तक्षेप करने वाले तीसरे पक्ष को कानूनी और वित्तीय जवाबदेही से मुक्त नहीं किया जा सकता।
- महिलाओं को अधिकार: यह विवाहेतर संबंधों से पीड़ित महिलाओं (और पुरुषों) को एक शक्तिशाली कानूनी हथियार प्रदान कर सकता है, जिससे वे अपने रिश्ते को बचाने या कम से कम उस नुकसान की भरपाई करने की मांग कर सकेंगी जो किसी बाहरी व्यक्ति के कारण हुआ है।
- निजी स्वतंत्रता बनाम सुरक्षा: इस मामले में कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या एक विवाहित व्यक्ति के साथ संबंध रखने वाले तीसरे पक्ष के कार्य को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में रखा जा सकता है, या यह जानबूझकर किसी और की शादी को तोड़ने के लिए किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य है।
फिलहाल, हाई कोर्ट इस जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रहा है, और यह फैसला निश्चित रूप से आधुनिक भारतीय रिश्तों और कानून दोनों पर गहरा प्रभाव डालेगा।