
नई दिल्ली/लाइफस्टाइल डेस्क। आधुनिक जीवनशैली ने हमें सुख-सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके बदले में हमारा ‘सुकून’ छीन लिया है। 15 अप्रैल 2026 को एक प्रमुख ‘मैरिज काउंसलिंग सेंटर’ द्वारा जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट ने आधुनिक समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महानगरों में रहने वाले लगभग 45% जोड़ों (Couples) के बीच अलगाव और तनाव की सबसे बड़ी वजह अब कोई तीसरा व्यक्ति नहीं, बल्कि ‘ऑफिस का काम और उससे उपजा तनाव’ है।
यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि काम और निजी जीवन के बीच की रेखा को फिर से नहीं खींचा गया, तो भविष्य में वैवाहिक संस्थाओं के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
वर्क फ्रॉम होम: वरदान या अभिशाप?
रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) और ‘हाइब्रिड मॉडल’ ने दफ्तर और घर के बीच के अंतर को समाप्त कर दिया है।
-
काम के घंटों की अनिश्चितता: पहले लोग दफ्तर छोड़ने के बाद काम को वहीं छोड़ आते थे, लेकिन अब लैपटॉप और स्मार्टफोन के कारण ऑफिस चौबीसों घंटे घर के अंदर मौजूद रहता है।
-
क्वालिटी टाइम की कमी: सर्वे में शामिल एक महिला ने बताया, “हम एक ही सोफे पर बैठते हैं, लेकिन हम साथ नहीं होते। एक पार्टनर ईमेल का जवाब दे रहा होता है और दूसरा ज़ूम कॉल पर होता है। यह शारीरिक उपस्थिति तो है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव शून्य है।”
बढ़ता कॉम्पिटिशन और ‘हमेशा उपलब्ध’ रहने का दबाव
बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन के कारण कर्मचारियों पर हमेशा ‘ऑनलाइन’ और ‘उपलब्ध’ रहने का मानसिक दबाव बना रहता है। देर रात तक चलने वाली मीटिंग्स और क्लाइंट कॉल्स पार्टनर के बीच संवाद (Communication) के रास्ते बंद कर देते हैं। जब एक पार्टनर तनाव में घर लौटता है या घर पर ही तनावपूर्ण काम करता है, तो उसका चिड़चिड़ापन अक्सर जीवनसाथी पर निकलता है, जो धीरे-धीरे बड़े झगड़ों और भावनात्मक दूरी का रूप ले लेता है।
भावनात्मक दूरी और ‘साइलेंट किलर’ स्ट्रेस
काउंसलिंग सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस स्ट्रेस एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। यह रिश्तों को अचानक नहीं तोड़ता, बल्कि धीरे-धीरे दीमक की तरह खोखला करता है:
-
संवादहीनता: काम की थकान के कारण कपल्स एक-दूसरे से दिनभर की बातें साझा करना बंद कर देते हैं।
-
इंटिमेसी में कमी: मानसिक तनाव के कारण शारीरिक और भावनात्मक नजदीकी कम होने लगती है।
-
तुलना और कुंठा: जब एक पार्टनर काम में बहुत व्यस्त होता है, तो दूसरे को उपेक्षित महसूस होता है, जिससे मन में कुंठा और नाराजगी घर कर लेती है।
एक्सपर्ट्स का समाधान: ‘टेक-फ्री बेड टाइम’ और अन्य उपाय
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स और मनोवैज्ञानिकों ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कड़े लेकिन प्रभावी सुझाव दिए हैं:
-
टेक-फ्री बेड टाइम: सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (फोन, लैपटॉप) को बेडरूम से बाहर रखें। यह समय केवल पार्टनर के लिए होना चाहिए।
-
डिजिटल बाउंड्री: ऑफिस के सहकर्मियों को स्पष्ट रूप से बताएं कि एक निश्चित समय के बाद आप केवल आपातकालीन स्थिति में ही उपलब्ध होंगे।
-
सक्रिय श्रवण (Active Listening): जब पार्टनर अपनी दिनभर की थकान साझा करे, तो उसे समाधान देने के बजाय केवल उसे सुनें। उसे महसूस होना चाहिए कि वह आपके लिए प्राथमिकता है।
-
वीकेंड नो-वर्क पॉलिसी: सप्ताह के अंत में ऑफिस के ईमेल या काम से पूरी तरह दूरी बनाएं और किसी छोटी ट्रिप या एक्टिविटी का हिस्सा बनें।
निष्कर्ष: करियर जरूरी है, पर रिश्ता भी
रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि सफलता की दौड़ में हम अक्सर उन लोगों को पीछे छोड़ देते हैं जिनके लिए हम यह सब कर रहे हैं। 45% का आंकड़ा महज एक संख्या नहीं, बल्कि एक अलार्म है। करियर में उन्नति महत्वपूर्ण है, लेकिन वह उस कीमत पर नहीं होनी चाहिए जहाँ आप अपने घर में ही अजनबी बन जाएं।
आज 15 अप्रैल को जब हम इस रिपोर्ट पर चर्चा कर रहे हैं, तो यह सही समय है कि हम अपने जीवनसाथी की ओर देखें और खुद से पूछें— “क्या मेरा स्मार्टफोन मेरे पार्टनर से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है?”
याद रखें: ऑफिस आपको ‘रिप्लेस’ (बदल) कर सकता है, लेकिन आपका परिवार नहीं। अपने रिश्तों में निवेश करें, लाभ आपको सुकून के रूप में मिलेगा।