🢀
रिश्तों का नया आयाम: भारत में बढ़ा LAT शादियों का चलन, ‘प्यार है मगर दूरी भी चाहिए’ के सिद्धांत पर जी रहे हैं कपल

नई दिल्ली। भारतीय समाज में जहाँ शादी को दो परिवारों का मिलन और एक छत के नीचे साथ रहना माना जाता है, वहीं अब रिलेशनशिप के एक बिल्कुल नए आयाम ने दस्तक दी है। देश के मेट्रो शहरों और युवा प्रोफेशनल्स के बीच ‘लिविंग अपार्ट टुगेदर’ (Living Apart Together – LAT) शादियों का चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस ट्रेंड में शादीशुदा जोड़े एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह से कमिटेड होते हैं और गहरा प्यार भी करते हैं, लेकिन अपनी मर्जी से अलग-अलग घरों या अपार्टमेंट में रहते हैं।

यह ट्रेंड मुख्य रूप से जनरेशन Z (Gen Z) और उन युवा प्रोफेशनल्स के बीच तेजी से जगह बना रहा है, जो अपने करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Individual Freedom) को प्राथमिकता देना चाहते हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि LAT उन जोड़ों के लिए एक आदर्श समाधान है जो पारंपरिक वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करना चाहते हैं।

LAT ट्रेंड क्यों हो रहा है लोकप्रिय?

एक्सपर्ट्स और रिलेशनशिप काउंसलर्स इस चलन के बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण बताते हैं:

  1. व्यक्तिगत स्पेस और स्वतंत्रता: कई युवा पार्टनर मानते हैं कि एक ही छत के नीचे 24×7 रहने से रिश्ते में घुटन और टकराव पैदा हो सकता है। LAT उन्हें अपना ‘निजी स्पेस’ बनाए रखने और एक-दूसरे को मिस करने का मौका देता है, जिससे रिश्ते में नयापन बना रहता है।
  2. करियर पर फोकस: कई बार पति और पत्नी दोनों के करियर अलग-अलग शहरों या देश में होते हैं। LAT उन्हें अपने करियर से समझौता किए बिना शादी के बंधन में बंधे रहने की सुविधा देता है।
  3. पुरानी आदतों से मुक्ति: कुछ जोड़े अलग-अलग घरों में रहने को इसलिए चुनते हैं ताकि वे अपने पार्टनर की छोटी-छोटी आदतों (जैसे देर रात काम करना या अलग खाने की पसंद) से होने वाले दैनिक झगड़ों से बच सकें।
  4. पारंपरिक बोझ से आजादी: LAT जोड़े पारंपरिक वैवाहिक जीवन के बोझिल नियमों, जैसे कि हर रोज एक साथ डिनर करना या पारिवारिक जिम्मेदारियों को एक ही तरीके से निभाना, से मुक्त रहते हैं।

रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. अंजना शर्मा कहती हैं, “LAT का मतलब यह नहीं है कि उनके रिश्ते में प्यार कम है, बल्कि इसका मतलब है कि वे अपने प्यार को पारंपरिक सांचे में बांधना नहीं चाहते। वे क्वालिटी टाइम को क्वांटिटी टाइम से ज्यादा महत्व देते हैं। यह एक परिपक्व फैसला है, जहाँ संवाद और विश्वास रिश्ते की नींव बनते हैं।”

हालांकि, समाज के एक तबके ने इस चलन को संदेह की नजर से देखा है, लेकिन LAT को अपनाने वाले जोड़े मानते हैं कि यह उनकी खुशी और रिश्ते की लंबी उम्र के लिए सबसे सही तरीका है। यह नया चलन भारतीय विवाह की परिभाषा को चुनौती दे रहा है और यह स्थापित कर रहा है कि रिश्ते को चलाने के लिए प्यार, विश्वास और संवाद ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, न कि भौगोलिक निकटता।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️