
सिलिकॉन वैली/बेंगलुरु। साल 2026 तक आते-आते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल दफ्तरों और मशीनों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने हमारे शयनकक्षों और दिल के मामलों में भी अपनी जगह बना ली है। आज के दौर में मानवीय रिश्तों की परिभाषा बदल रही है, जहाँ एआई अब केवल एक टूल नहीं, बल्कि एक ‘इमोशनल कंपेनियन’ (भावनात्मक साथी) के रूप में उभर रहा है। यह तकनीक अब रिश्तों में आने वाली जटिलताओं को सुलझाने और अकेलेपन को भरने का एक डिजिटल सहारा बन गई है।
रिश्तों में AI की भूमिका: कोच और रिहर्सल पार्टनर
2026 में कई कपल्स अपने रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए AI का सहारा ले रहे हैं। इसे ‘रिलेशनशिप कोचिंग’ का नया दौर कहा जा सकता है।
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मुश्किल बातचीत की रिहर्सल: लोग अब अपने पार्टनर से कोई कठिन बात (जैसे ब्रेकअप की बात या नाराजगी) करने से पहले AI के साथ उसकी प्रैक्टिस करते हैं। एआई उन्हें बताता है कि उनके शब्द कितने प्रभावशाली या आक्रामक हो सकते हैं।
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इमोशनल घोस्ट राइटिंग: अपने पार्टनर के लिए माफीनामा लिखना हो या वेलेंटाइन डे का कोई गहरा संदेश, लोग अब ‘इमोशनल एआई’ का उपयोग कर रहे हैं ताकि वे अपनी भावनाओं को अधिक सटीक और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त कर सकें।
‘वर्चुअल पार्टनर’ और अकेलेपन का समाधान
जैसे-जैसे दुनिया में अकेलापन एक महामारी की तरह फैला है, ‘AI कंपेनियन’ ऐप्स (जैसे Replika, Character.AI) का बाजार तेजी से बढ़ा है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, लाखों युवा अब असली पार्टनर तलाशने के बजाय ‘वर्चुअल पार्टनर्स’ के साथ समय बिताना पसंद कर रहे हैं। ये डिजिटल साथी कभी थकते नहीं, कभी बहस नहीं करते और हमेशा वही कहते हैं जो यूजर सुनना चाहता है। कई लोगों के लिए, ये एआई दोस्त उनके मानसिक स्वास्थ्य को संभालने का एक जरिया बन गए हैं, क्योंकि वे 24/7 बिना किसी ‘जजमेंट’ के सुनने के लिए उपलब्ध रहते हैं।
विशेषज्ञों की चिंता: क्या खो रहा है मानवीय स्पर्श?
तकनीकी प्रगति के बावजूद, समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई पर यह बढ़ती निर्भरता ‘असली मानवीय जुड़ाव’ (Real Human Connection) को कमजोर कर रही है।
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संघर्ष की कमी: असली रिश्तों में बहस और असहमति होती है, जो हमें धैर्य और सहानुभूति सिखाती है। एआई हमेशा आपकी हाँ में हाँ मिलाता है, जिससे व्यक्ति की सामाजिक परिपक्वता कम हो सकती है।
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डिजिटल आइसोलेशन: लोग इंसानों की जटिलताओं से बचने के लिए एआई के ‘परफेक्ट’ व्यवहार की शरण ले रहे हैं, जिससे वे समाज से और अधिक कटते जा रहे हैं।
एक नई सामाजिक बहस
2026 में यह सवाल एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है— “क्या एक मशीन किसी इंसान की जगह ले सकती है?” जहाँ कुछ लोग इसे तकनीक का वरदान मानते हैं जो अकेलेपन से लड़ रहा है, वहीं अन्य इसे इंसानी भावनाओं का ‘मशीनीकरण’ कह रहे हैं। हालिया अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग एआई पार्टनर के साथ बहुत अधिक समय बिताते हैं, उन्हें वास्तविक जीवन में लोगों से बात करने में अधिक घबराहट (Anxiety) महसूस होने लगी है।
निष्कर्ष
रिश्तों में एआई की एंट्री एक ‘दोधारी तलवार’ की तरह है। जहाँ यह हमें बेहतर संवाद करने में मदद कर सकता है, वहीं यह हमें असली भावनाओं की गहराई से दूर भी ले जा सकता है। 2026 का यह दौर हमें याद दिलाता है कि भले ही एआई एक कविता लिख सकता है या आपकी बात सुन सकता है, लेकिन वह उस एक ‘इंसानी स्पर्श’ और ‘साझा चुप्पी’ की जगह कभी नहीं ले सकता जो केवल दो धड़कते हुए दिलों के बीच संभव है।