
लखनऊ। आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार, पेशेवर महत्वाकांक्षाएँ और निरंतर बढ़ता करियर दबाव आज के विवाहित और डेटिंग कपल्स के सामने एक नई और गंभीर मानसिक चुनौती खड़ी कर रहा है: ‘रिलेशनशिप एंग्जायटी’ (Relationship Anxiety)। मनोचिकित्सकों के अनुसार, यह समस्या महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक तेज़ी से फैल रही है और स्वस्थ, प्रेमपूर्ण रिश्तों को अंदर से खोखला कर रही है।
अनिश्चितता और असुरक्षा का जाल
रिलेशनशिप एंग्जायटी वह भावनात्मक स्थिति है जहाँ व्यक्ति अपने रिश्ते को लेकर लगातार संदेह, अनिश्चितता और असुरक्षा की भावनाओं से घिरा रहता है। इसके मूल में कई गहरे डर छिपे होते हैं:
- खो देने का डर: पार्टनर के प्रति अत्यधिक भावनात्मक लगाव के कारण उसे हमेशा के लिए खो देने का एक निरंतर और तर्कहीन डर।
- आत्मविश्वास की कमी: खुद को पार्टनर के प्रेम या अपेक्षाओं के लिए ‘पर्याप्त’ न समझ पाना।
- अविश्वास: पार्टनर की भावनाओं, प्रतिबद्धता या वफादारी पर बार-बार संदेह करना।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह एंग्जायटी अक्सर पुराने भावनात्मक अनुभवों या असुरक्षित परवरिश से उत्पन्न होती है, लेकिन मौजूदा लाइफस्टाइल की चुनौतियाँ इसे और भी विकराल रूप दे देती हैं।
संवाद की कमी: तनाव का मुख्य जनक
रिलेशनशिप एंग्जायटी के बढ़ने का सबसे बड़ा उत्प्रेरक संवाद (Communication) की कमी है। करियर की दौड़ में फंसे कपल्स निजी जीवन में ‘क्वालिटी टाइम’ नहीं निकाल पाते।
जब पार्टनर एक-दूसरे के साथ अपनी चिंताएँ, अपेक्षाएँ और दिनभर के तनाव खुलकर साझा नहीं करते, तो यह भावनात्मक दूरी गलतफहमी और संदेह को जन्म देती है। एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर छोटी-छोटी बातों पर ज़्यादा प्रतिक्रिया देता है, जिससे रिश्ते में अनावश्यक रूप से झगड़े बढ़ जाते हैं। यह स्थिति एक विषाक्त चक्र (Toxic Cycle) को जन्म देती है, जो धीरे-धीरे रिश्ते की भावनात्मक नींव को नष्ट कर देता है।
बचाव के उपाय: संवाद और क्वालिटी टाइम
मनोवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस एंग्जायटी का समाधान न किया जाए, तो यह भावनात्मक थकान (Emotional Burnout) और गंभीर मामलों में नैदानिक डिप्रेशन (Clinical Depression) का कारण बन सकती है।
तनाव से निपटने और रिश्ते को स्वस्थ बनाए रखने के लिए विशेषज्ञों ने तीन सरल, लेकिन शक्तिशाली उपाय सुझाए हैं:
- नियमित और ईमानदार संवाद: अपनी भावनाओं, यहाँ तक कि अपनी असुरक्षाओं को भी पार्टनर से निडर होकर साझा करें।
- क्वालिटी टाइम पर ज़ोर: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट का समय फोन और काम के विकर्षणों से दूर रहकर सिर्फ पार्टनर के साथ बिताएं।
- प्रोफेशनल मदद: यदि एंग्जायटी जीवन पर हावी हो रही है, तो थेरेपिस्ट या काउंसलर से कपल थेरेपी लेने में संकोच न करें।
रिश्ते में विश्वास और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों पार्टनर्स का मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि एक स्वस्थ मन ही एक स्वस्थ रिश्ते का निर्माण कर सकता है।