
श्री गंगानगर/अनूपगढ़, राजस्थान। (दिनांक: 29 अक्टूबर 2025)
श्री गंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में हिरण के शिकार की एक और शर्मनाक और नापाक कोशिश सामने आई है, जिसने क्षेत्र के वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय निवासियों की चिंता को बढ़ा दिया है। यह घटना एक बार फिर इस क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा की बदहाल स्थिति को उजागर करती है, जहाँ वन्यजीव तस्करों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
घटना का विवरण
मिली जानकारी के अनुसार, अनूपगढ़ के ग्रामीण इलाके में देर रात शिकारियों ने एक हिरण को फंसाने या मारने का प्रयास किया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने संदिग्ध गतिविधि देखी और वन विभाग को सूचित करने के साथ ही खुद भी मौके पर पहुंचे। हालांकि, ग्रामीणों के पहुंचने से पहले ही शिकारी अपने मकसद में सफल नहीं हो पाए और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
मौके पर, हिरण के फंसाने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ संदिग्ध उपकरण और फंदे बरामद किए गए हैं, जिन्हें पुलिस और वन विभाग ने जब्त कर लिया है। इस घटना से यह साफ हो गया है कि इलाके में वन्यजीवों के शिकार की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।
स्थानीय निवासियों और वन्यजीव प्रेमियों की चिंता
अनूपगढ़ और श्री गंगानगर का इलाका रेगिस्तानी और अर्द्ध-रेगिस्तानी है, जो हिरण, विशेषकर चिंकारा और काला हिरण (ब्लैकबक) के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है। वन्यजीवों के शिकार की लगातार हो रही कोशिशों से स्थानीय लोग बेहद चिंतित हैं।
- जनभावना: ग्रामीणों का कहना है कि वे इन वन्यजीवों को अपनी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत मानते हैं, और शिकारियों की इस तरह की गतिविधियों से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है।
- सुरक्षा की मांग: स्थानीय लोगों ने वन विभाग और पुलिस प्रशासन से गहन गश्त और कड़ी निगरानी की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग के कर्मचारियों की कमी और निष्क्रियता के कारण शिकारी बेखौफ होकर घूम रहे हैं।
वन्यजीव सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा
श्री गंगानगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा एक गंभीर और निरंतर मुद्दा बना हुआ है। तस्कर अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों का लाभ उठाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
आवश्यक कार्रवाई:
- कड़ी कानूनी कार्रवाई: पकड़े गए शिकारियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कठोरतम धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
- खुफिया तंत्र मजबूत करना: वन विभाग को स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर एक मजबूत खुफिया तंत्र विकसित करना चाहिए, जो शिकार की किसी भी संभावित कोशिश की जानकारी पहले ही दे सके।
- जागरूकता अभियान: स्कूलों और गाँवों में वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
वन विभाग ने आश्वस्त किया है कि वे फरार शिकारियों की पहचान कर उन्हें जल्द ही गिरफ्तार करेंगे और क्षेत्र में गश्त बढ़ाएंगे ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।