
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर का क्षेत्र इस समय पाकिस्तान से संचालित हो रहे ड्रोन ड्रग नेटवर्क (Drone Drug Network) के गंभीर और बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। सीमा पार से उड़कर आ रहे ड्रोन, करोड़ों रुपये की हेरोइन भारतीय सीमा क्षेत्र में गिरा रहे हैं, जिससे स्थानीय सुरक्षा और युवाओं का भविष्य दोनों खतरे में हैं। स्थिति की गंभीरता के बावजूद, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने में हो रही प्रशासनिक देरी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
💸 ड्रोन तस्करी का भयावह आँकड़ा
श्रीगंगानगर और आस-पास के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी अब एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले डेढ़ साल की अवधि में तस्करों ने ड्रोन का उपयोग करके 3.40 अरब रुपये (340 करोड़ रुपये) से अधिक की उच्च-गुणवत्ता वाली हेरोइन को सफलतापूर्वक भारतीय सीमा में गिराया है।
ये आँकड़े दर्शाते हैं कि श्रीगंगानगर क्षेत्र पाकिस्तान में बैठे खतरनाक ड्रग सिंडिकेट के प्रमुख निशानों में से एक बन गया है। तस्कर रात के अंधेरे और खराब मौसम का फायदा उठाकर ड्रोन को ऑपरेट करते हैं, जिससे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए उन्हें ट्रैक करना और मार गिराना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इन नशीले पदार्थों को सीमा पार बैठे तस्कर, यहाँ के स्थानीय रिसीवरों तक पहुँचाते हैं, जो इसे आगे देश के विभिन्न हिस्सों में फैलाते हैं।
🏛️ प्रशासनिक लापरवाही: डेढ़ साल से लटका NCB ऑफिस
इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने डेढ़ साल पहले ही श्रीगंगानगर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का एक फील्ड ऑफिस (Field Office) खोलने की महत्वपूर्ण मंजूरी दे दी थी। इस ऑफिस का मुख्य उद्देश्य पंजाब और राजस्थान की सीमा पर ड्रग्स के बढ़ते प्रवाह पर नकेल कसने और स्थानीय पुलिस व BSF के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक प्रक्रिया में सुस्ती और जमीन आवंटन या कर्मचारियों की तैनाती जैसी औपचारिकताओं में हो रही अत्यधिक देरी के कारण यह अतिआवश्यक ऑफिस अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
इस प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं:
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समन्वय का अभाव: NCB की सीधी उपस्थिति न होने से सीमा सुरक्षा बल, स्थानीय पुलिस और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) जैसी अन्य एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई में समन्वय प्रभावित हो रहा है।
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तस्करों को छूट: इस देरी का सीधा फायदा ड्रग तस्करों को मिल रहा है, जिन्हें बिना किसी केंद्रीय एजेंसी के कड़े हस्तक्षेप के अपना नेटवर्क चलाने में आसानी हो रही है।
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बढ़ता खतरा: NCB ऑफिस की स्थापना में हो रही देरी स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ते नशे के खतरे को कम करने के प्रयासों को धीमा कर रही है।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करें और जल्द से जल्द NCB ऑफिस को कार्यात्मक बनाएं, ताकि सीमा क्षेत्र को इस ड्रग महामारी से बचाया जा सके।