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🚨 सनसनीखेज रिपोर्ट: गंगनहर का ‘रण’ – क्या प्यासा मरेगा अन्नदाता?

रेगिस्तान की छाती चीरकर हरियाली लाने वाली गंगनहर आज सूखी पड़ी है, और इसी के साथ सूख रहे हैं श्रीगंगानगर के किसानों के हलक और उनके खेतों की उम्मीदें। आज 20 फरवरी को सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में जो मंजर देखने को मिला, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।


🛑 चक्काजाम: थमी पहियों की रफ्तार, गूंजा इंकलाब

सुबह के ठीक 10 बजे थे, जब हजारों की तादाद में किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर उतर आए। सीसी हैड (CC Head) और फूसेवाला टोल प्लाजा पर देखते ही देखते किसानों का कब्जा हो गया। हाईवे पर सन्नाटा पसर गया और देखते ही देखते दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।

किसानों के हाथों में डंडे नहीं, बल्कि सूखी हुई फसलें थीं—यह दिखाने के लिए कि सरकार की अनदेखी ने उन्हें कहां लाकर खड़ा कर दिया है। हवा में गूंजते “प्रशासन मुर्दाबाद” और “नहर में पानी दो” के नारों ने माहौल में भारी तनाव पैदा कर दिया है।

⏳ 32 दिन का सन्नाटा और टूटा सब्र

सनसनी इस बात की है कि फिरोजपुर फीडर की नहरबंदी को आज 32 दिन बीत चुके हैं। नियम के मुताबिक, मेंटेनेंस के बाद पानी का प्रवाह शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन श्रीगंगानगर की टेल (अंतिम छोर) तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंची।

“हमारे खेत फटने लगे हैं, पशु प्यासे मर रहे हैं और घर में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। क्या हम सिर्फ वोट देने के लिए बने हैं?” — यह सवाल आज हर उस किसान का है जो चिलचिलाती धूप में टोल प्लाजा पर डटा है।

🌊 1500 क्यूसेक का वो ‘झूठा’ वादा?

किसानों का आरोप है कि पिछले सप्ताह हुई वार्ता में प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया था कि पंजाब से 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि नहर के तल में आज भी धूल उड़ रही है। किसानों का दावा है कि राजनीतिक मिलीभगत के कारण पानी को ऊपरी इलाकों में ही रोक लिया गया है और श्रीगंगानगर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

⚠️ प्रशासन के हाथ-पांव फूले

जैसे ही टोल प्लाजा पर कब्जे की खबर फैली, भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया। जिला कलेक्टर और एसपी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, लेकिन किसान अब किसी ‘कागजी वादे’ पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

मौके की गंभीर स्थितियां:

  • सैकड़ों ट्रक फंसे: हाईवे जाम होने से जरूरी सामान की सप्लाई रुक गई है।

  • आर-पार की जंग: किसानों ने साफ कह दिया है कि जब तक सीसी हैड पर पानी की गर्जना सुनाई नहीं देगी, तब तक टोल प्लाजा नहीं खुलेगा।

  • राशन की तैयारी: किसान अपने साथ हफ्तों का राशन और टेंट लेकर आए हैं, जो इशारा है कि यह आंदोलन लंबा खिंच सकता है।

📢 क्या यह व्यवस्था की नाकामी है?

श्रीगंगानगर को ‘राजस्थान का अन्न भंडार’ कहा जाता है, लेकिन आज वही भंडार खाली होने की कगार पर है। अगर अगले 24 घंटों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो रबी की बची-कुची फसलें पूरी तरह तबाह हो जाएंगी, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की थाली पर पड़ेगा।

सवाल यह है: क्या सरकार किसानों के इस आक्रोश को शांत कर पाएगी? या फिर गंगनहर का यह ‘रण’ आने वाले दिनों में और भी खूनी संघर्ष का रूप ले लेगा?

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️