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🚨 पहलगाम हमले पर NIA का आरोपपत्र: पाकिस्तान समर्थित ‘युद्ध की साज़िश’ का खुलासा 🚨

जम्मू/नई दिल्ली (श्री गंगानगर से संबंधित): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के संबंध में अपनी व्यापक जांच पूरी करते हुए, जम्मू की विशेष अदालत में एक विस्तृत आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है। यह आरोपपत्र न केवल इस विशेष हमले में शामिल आतंकियों की पहचान करता है, बल्कि इस साज़िश के पीछे की बड़ी तस्वीर—यानी पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों द्वारा भारत के खिलाफ छेड़े जा रहे ‘युद्ध’—को भी उजागर करता है।

लश्कर और टीआरएफ की खतरनाक साज़िश

NIA ने अपने आरोपपत्र में स्पष्ट किया है कि पहलगाम हमला पूरी तरह से पाकिस्तान के समर्थन से संचालित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके मुखौटा संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (The Resistance Front – TRF) की एक सुनियोजित साज़िश का हिस्सा था।

  • रणनीति: एजेंसी ने बताया कि ये समूह सीमा पार से युवाओं को कट्टरपंथी बनाते हैं, उन्हें हथियार और विस्फोटक भेजते हैं, और उन्हें सुरक्षा बलों तथा नागरिकों पर हमला करने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • उद्देश्य: आरोपपत्र के अनुसार, इस साज़िश का अंतिम लक्ष्य भारत में अस्थिरता फैलाना, सुरक्षा बलों पर हमले करना, और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों को निशाना बनाना था। NIA ने इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत “भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी” बताया है।

श्री गंगानगर कनेक्शन की संभावना

चूंकि श्री गंगानगर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती ज़िला है, NIA और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अक्सर अपनी जांच का दायरा इन सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैलाती हैं। हालांकि आरोपपत्र सीधे तौर पर श्री गंगानगर के किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेता, लेकिन जांच के संभावित पहलुओं में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण हो जाता है:

  1. ड्रोन और हथियार तस्करी: पाकिस्तान अक्सर पंजाब और राजस्थान की सीमा से ड्रोन के माध्यम से हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की कोशिश करता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाती हैं कि क्या पहलगाम हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों को श्री गंगानगर सीमा क्षेत्र से होकर कश्मीर पहुंचाया गया था।

  2. संचार नेटवर्क: आतंकी समूह अक्सर अपनी गतिविधियों के समन्वय के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित गुप्त संचार नेटवर्क (जैसे पाकिस्तानी सिम कार्ड, एन्क्रिप्टेड ऐप्स, या स्थानीय तस्करों) का उपयोग करते हैं। NIA इस बात की जांच कर रही होगी कि क्या ऐसे किसी सपोर्ट नेटवर्क का जाल श्री गंगानगर या उसके आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ था, जिसका उपयोग पहलगाम साज़िश में किया गया हो।

  3. वित्तीय सहायता: टेरर फंडिंग की जांच भी सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचती है, जहाँ हवाला या नशीले पदार्थों की तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

न्याय की दिशा में एक और कदम

आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, अब यह मामला जम्मू की विशेष अदालत में चलेगा। NIA ने पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जिनमें डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, और गवाहों के बयान शामिल हैं। यह चार्जशीट न केवल पहलगाम के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की ज़ीरो-टॉलरेंस नीति को भी मज़बूत करती है।

सीमा सुरक्षा को देखते हुए, श्री गंगानगर में सुरक्षा एजेंसियां हमेशा हाई अलर्ट पर रहती हैं, ताकि देश के किसी भी हिस्से में होने वाले आतंकी साज़िशों के लिए इस क्षेत्र का उपयोग न किया जा सके।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️