🢀
🚜 उर्वरक वितरण में अनियमितता और जमाखोरी का खुलासा: कृषि विभाग के भौतिक सत्यापन के आदेश पर विस्तृत रिपोर्ट

श्री गंगानगर जिले में रबी सीजन की बुवाई के चरम पर यूरिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण उर्वरकों के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता और संभावित जमाखोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर संकट ने क्षेत्र के किसानों को मुश्किल में डाल दिया है, जिन्हें आवश्यक खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कृषि आयुक्तालय द्वारा मामले का संज्ञान लेते हुए, जिले के कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत तत्काल भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

उर्वरक संकट की पृष्ठभूमि

 

श्री गंगानगर का यह क्षेत्र मुख्य रूप से गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी रबी फसलों की खेती के लिए जाना जाता है। इन फसलों की बुवाई के समय यूरिया (नाइट्रोजन) और डीएपी (फॉस्फेट) उर्वरकों की मांग अचानक बढ़ जाती है। वर्तमान में, जिले के रायसिंहनगर, अनूपगढ़, श्रीविजयनगर, घड़साना और रावला सहित कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में आपूर्ति की तुलना में मांग कहीं अधिक है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए परेशान हैं, लेकिन उन्हें विक्रेताओं के पास से पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे खाद संकट गहरा गया है।

जमाखोरी और अनियमित वितरण का खुलासा

 

कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा उर्वरक पोर्टल (Fertilizer Portal) पर की गई विस्तृत जांच में वितरण प्रणाली में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ। यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि सरकारी नियमों के अनुसार, उर्वरक की बिक्री आधार कार्ड से जुड़ी हुई है और एक किसान को एक निश्चित मात्रा में ही खाद जारी की जा सकती है ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके।

पोर्टल के विश्लेषण में यह सामने आया कि 100 से अधिक उर्वरक विक्रेताओं ने इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की। नियमों के विपरीत, कई विक्रेताओं ने एक ही किसान के आधार कार्ड पर 50 बैग से भी अधिक यूरिया जारी कर दी। एक किसान को इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक जारी करना असामान्य है, खासकर तब जब पूरे जिले में खाद की कमी हो। इस तरह के लेन-देन स्पष्ट रूप से जमाखोरी (Hoarding) और अनियमित बिक्री (Irregular Distribution) की ओर इशारा करते हैं, जहाँ विक्रेता और कुछ किसान मिलकर खाद को बाजार भाव से अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

कृषि विभाग की कड़ी कार्रवाई

 

इस गंभीर मनमानी और किसानों की मुश्किलों को देखते हुए, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने तुरंत कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। उन्होंने जिले के सभी सहायक निदेशकों और संबंधित अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देशों के साथ तुरंत भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अभियान शुरू करने का आदेश दिया है:

  1. तत्काल भौतिक सत्यापन: उन सभी उर्वरक विक्रेताओं के स्टॉक और रिकॉर्ड का तुरंत मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए, जिनके वितरण में अनियमितताएं पाई गई हैं।

  2. खरीदारों की रिपोर्ट: उन किसानों की एक विस्तृत सूची और रिपोर्ट तैयार की जाए जिन्होंने अपने आधार कार्ड पर 50 बैग से अधिक यूरिया खरीदा है। इन किसानों से खाद की वास्तविक उपयोगिता और भंडारण की जानकारी ली जाएगी।

  3. विक्रेताओं की रिपोर्ट: संबंधित विक्रेताओं से भी उनके वितरण पैटर्न और भारी मात्रा में की गई बिक्री का स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

  4. दोषियों पर कार्रवाई: भौतिक सत्यापन में अनियमितता सिद्ध होने पर दोषी विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने और जमाखोरी अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना, कालाबाजारी पर रोक लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि रबी की बुवाई के लिए आवश्यक उर्वरक सभी जरूरतमंद किसानों तक उचित मात्रा और निर्धारित मूल्य पर पहुंच सके। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि कृषि उपज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️