
वैश्विक आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का श्रीगंगानगर में 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आगमन एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण घटना रही। यह अवसर शहर के आध्यात्मिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए एक उत्सव के समान था। गुरुदेव, जो ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ (Art of Living) फाउंडेशन के संस्थापक हैं, ने शहर के ब्लूमिंग डेल्स इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित ‘शिवोत्सव’ महासत्संग कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तगण और जिज्ञासु लोग उनके दर्शन और ज्ञान के अनुभव के लिए उपस्थित हुए।
दो दशक बाद पुनर्मिलन का अवसर
गुरुदेव का श्रीगंगानगर आगमन इसलिए भी विशेष था क्योंकि उन्होंने लगभग दो दशकों के बाद इस शहर में कदम रखा। इस लंबे इंतजार ने भक्तों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया था। कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। श्रीगंगानगर और आस-पास के क्षेत्रों से आए लोगों में गुरुदेव के दर्शन और उनके प्रवचन सुनने की गहरी लालसा दिखाई दी।
‘शिवोत्सव’ महासत्संग का आयोजन
ब्लूमिंग डेल्स इंटरनेशनल स्कूल का परिसर ‘शिवोत्सव’ महासत्संग के लिए भव्य रूप से सजाया गया था। ‘शिवोत्सव’ नाम यह दर्शाता है कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आध्यात्मिक आनंद और मानवता के उत्थान पर केंद्रित था। इस महासत्संग में मुख्य रूप से निम्नलिखित गतिविधियां शामिल थीं:
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गुरुदेव के प्रवचन (ज्ञान वार्ता): गुरुदेव ने जीवन की चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आंतरिक शांति और प्रसन्नता प्राप्त करने के मार्ग पर अपने गहन और व्यावहारिक विचार साझा किए। उन्होंने सरल शब्दों में जटिल आध्यात्मिक सिद्धांतों को समझाया, जिससे आम लोग भी उन्हें आसानी से आत्मसात कर सकें।
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सामूहिक ध्यान (मेगा मेडिटेशन): कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण गुरुदेव के मार्गदर्शन में किया गया सामूहिक ध्यान था। हजारों लोगों ने एक साथ बैठकर ध्यान का अनुभव किया, जिससे वातावरण में गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
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भजन और संगीत: भक्तिपूर्ण भजनों और संगीत ने वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया। ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के कलाकारों ने मधुर संगीत प्रस्तुत किया, जिसने भक्तों को आध्यात्मिकता के भाव में डुबो दिया।
मानवतावादी संदेश और समाज पर प्रभाव
श्री श्री रविशंकर केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं, बल्कि वह विश्व शांति और मानवतावादी कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। ‘शिवोत्सव’ में उन्होंने सेवा, करुणा और सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक शांति ही विश्व शांति की ओर पहला कदम है।
इस कार्यक्रम का श्रीगंगानगर के लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा। लोगों ने मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मक जीवन जीने के लिए गुरुदेव द्वारा सिखाए गए सरल लेकिन शक्तिशाली तकनीकों को सीखने का अवसर पाया।
इस आयोजन से यह भी स्पष्ट हुआ कि श्रीगंगानगर की जनता में आध्यात्मिकता और सामाजिक कार्यों के प्रति गहरी आस्था है। गुरुदेव का यह दौरा न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि यह क्षेत्र में सामुदायिक एकजुटता और सकारात्मकता की भावना को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आध्यात्मिक कार्यक्रम भी बन गया।