
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में, जो पंजाब की सीमा से सटा हुआ है, पराली (फसल के अवशेष) जलाने की घटनाओं में वृद्धि के कारण शहर की हवा की गुणवत्ता (Air Quality Index – AQI) बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय चिंता का विषय है, बल्कि इसने आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है।
🌬️ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में खतरनाक उछाल
हाल के दिनों में श्रीगंगानगर और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान (चावल) और अन्य फसलों की कटाई के बाद किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाने का चलन तेजी से बढ़ा है। इस कारण धुएँ और कालिख के कण वायुमंडल में फैल गए हैं, जिससे शहर का AQI सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है।
वायु प्रदूषण में अचानक आए इस उछाल के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हैं:
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पराली दहन: खेतों में कम समय में अगली फसल की बुवाई के लिए किसान पराली को सबसे आसान और सस्ता तरीका मानकर आग लगा देते हैं।
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भौगोलिक स्थिति: हवा की दिशा और पड़ोसी राज्य पंजाब से आने वाला धुआँ भी श्रीगंगानगर के वायु प्रदूषण को बढ़ाता है।
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मौसम: सर्दियों के मौसम की शुरुआत में हवा की गति धीमी हो जाती है, जिससे धुआँ और प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) निचले वायुमंडल में ही रुक जाते हैं और जल्दी छितरा नहीं पाते।
😷 स्वास्थ्य पर सीधा असर
प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर ने शहर के निवासियों, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। हवा में धुएँ और धूल के कणों की अधिकता से निम्नलिखित परेशानियाँ सामने आ रही हैं:
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साँस लेने में तकलीफ (श्वसन संबंधी समस्याएँ): अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की स्थिति बिगड़ रही है।
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आँखों में जलन और एलर्जी: धुएँ के कारण लोगों की आँखों में तेज जलन और पानी आने की शिकायतें बढ़ी हैं।
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गले में खराश और खांसी: प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गले में लगातार खराश और सूखी खांसी आम हो गई है।
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दृश्यता (Visibility) में कमी: धुएँ के कारण सुबह और शाम के समय दृश्यता (विज़िबिलिटी) कम हो गई है, जिससे सड़कों पर यातायात दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
🗣️ प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
आमजन और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने श्रीगंगानगर जिला प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देने और पराली जलाने पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। किसानों को पराली के निपटान के लिए विकल्प प्रदान करने और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
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जागरूकता अभियान: किसानों को पराली जलाने के दुष्प्रभावों और इसके वैकल्पिक उपयोग (जैसे खाद बनाना या बायोमास ऊर्जा) के बारे में जागरूक किया जाए।
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सब्सिडी पर मशीनें: पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि उपकरणों (जैसे हैप्पी सीडर) पर सब्सिडी बढ़ाई जाए।
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सख्त जुर्माना: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पराली जलाने वाले किसानों पर उचित जुर्माना लगाया जाए।
प्रदूषण के इस गंभीर दौर में, नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और मास्क का उपयोग करें।