
जयपुर/श्री गंगानगर। 21 नवंबर 2025।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) ने अपनी परिचालन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को अभूतपूर्व स्तर तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी निर्णय लिया है। मुख्यालय, जयपुर से जारी एक नए आदेश के अनुसार, अब निगम की बसों की निरीक्षण और चेकिंग प्रक्रिया केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वीडियो साक्ष्य (Video Evidence) पर आधारित होगी। यह ऐतिहासिक फैसला श्री गंगानगर डिपो समेत पूरे राजस्थान राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
🛡️ भ्रष्टाचार पर लगाम और राजस्व में वृद्धि
यह कदम मुख्य रूप से बसों में होने वाली अनियमितताओं, खासकर बिना टिकट यात्रा (Ticketless Travel) और राजस्व की हेराफेरी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। निगम को लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि चेकिंग स्टाफ और बस कर्मचारियों की मिलीभगत से राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नए नियम के तहत, जब भी कोई फ्लाइंग स्क्वॉड (Flying Squad) या निरीक्षण टीम किसी बस की जांच करेगी, तो उन्हें पूरी प्रक्रिया को शुरू से अंत तक वीडियो रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा। इस वीडियो में यह स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए कि कितने यात्री बिना टिकट पाए गए, उनसे कितनी राशि वसूली गई, और मौके पर ही उन्हें टिकट जारी किया गया या नहीं।
🎥 कैसे काम करेगी यह नई प्रणाली?
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वीडियो रिकॉर्डिंग: चेकिंग स्टाफ को एक सरकारी या व्यक्तिगत मोबाइल डिवाइस का उपयोग करके निरीक्षण शुरू करने से पहले, दौरान और बाद की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करना होगा।
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साक्ष्य का संग्रहण: वीडियो में बस का नंबर, मार्ग, समय और चेकिंग के परिणाम (यात्रियों की संख्या, बकाया वसूली) स्पष्ट रूप से दर्ज होने चाहिए।
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अपलोडिंग और सत्यापन: रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज को तत्काल प्रभाव से डिपो या क्षेत्रीय कार्यालय के सर्वर पर अपलोड करना होगा। निरीक्षण रिपोर्ट (निरीक्षण मेमो) के साथ इस वीडियो प्रमाण की उपलब्धता अनिवार्य होगी, अन्यथा निरीक्षण को अमान्य माना जाएगा।
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जवाबदेही: यह वीडियो फुटेज अब निरीक्षण रिपोर्ट का अभिन्न अंग होगा। मुख्यालय स्तर पर इन वीडियो की रैंडम जाँच की जाएगी, जिससे चेकिंग स्टाफ की मनमानी और गलत रिपोर्टिंग पर प्रभावी रूप से लगाम लगेगी।
श्री गंगानगर डिपो के मुख्य प्रबंधक ने बताया कि इस प्रणाली से कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, “यह न केवल राजस्व रिसाव को रोकेगा, बल्कि यात्रियों के साथ स्टाफ के व्यवहार में भी पारदर्शिता लाएगा। यदि कोई यात्री अनुचित व्यवहार की शिकायत करता है, तो वीडियो साक्ष्य से सच्चाई का पता लगाना आसान होगा।”
RSRTC प्रबंधन का मानना है कि इस डिजिटल और पारदर्शी तरीके से चेकिंग होने पर, राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रोडवेज की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। यह पहल डिजिटल इंडिया और गुड गवर्नेंस की दिशा में राजस्थान रोडवेज का एक सराहनीय प्रयास है।