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💨 श्री गंगानगर में पराली का कहर: वायु गुणवत्ता गंभीर, सांस लेना हुआ मुश्किल

श्री गंगानगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान (Paddy) और अन्य फसलों की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली (Stubble) जलाने की बढ़ती घटनाओं ने एक बार फिर वायु प्रदूषण (Air Pollution) को गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है। 19 नवंबर के आसपास, जब तापमान में गिरावट आती है और हवा की गति धीमी हो जाती है, यह धुआँ वातावरण में नीचे ही जमा हो जाता है, जिससे शहर की हवा की गुणवत्ता (Air Quality) में खतरनाक गिरावट आई है।

प्रदूषण बढ़ने का कारण और प्रभाव

 

पराली जलाने से निकलने वाला घना धुआँ न केवल कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बल्कि पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और अन्य जहरीली गैसों का उत्सर्जन करता है। श्री गंगानगर की भौगोलिक स्थिति के कारण, यह धुआँ पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ जिले के खेतों से उठकर सीधे शहर की ओर आता है।

लोगों पर सीधा असर:

  • स्वास्थ्य समस्याएँ: बढ़ते प्रदूषण के कारण शहर के नागरिकों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे आम शिकायतें साँस लेने में कठिनाई (breathing difficulty), गले में खराश, लगातार आँखों में जलन (eye irritation) और एलर्जी हैं। बच्चों और बुजुर्गों, खासकर अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो गई है।

  • विज़िबिलिटी में कमी: वातावरण में धुएँ की मोटी परत छा जाने से दृश्यता (visibility) काफी कम हो गई है, जिससे सुबह और शाम के समय सड़कों पर यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासनिक चुनौतियाँ और किसानों की मजबूरी

 

राज्य और जिला प्रशासन ने पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है और उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसके बावजूद, ज़मीनी स्तर पर यह समस्या हर साल बनी रहती है।

किसानों की मजबूरी:

  • समय की कमी: धान और अगली फसल (जैसे गेहूँ) की बुवाई के बीच समय का अंतराल बहुत कम होता है। ऐसे में पराली को ज़मीन से हटाने का सबसे तेज़ और सस्ता तरीका उसे जला देना ही लगता है।

  • मशीनरी का अभाव: पराली को खेत में मिलाने या हटाने के लिए आवश्यक आधुनिक मशीनों (जैसे हैप्पी सीडर या सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम) की उच्च लागत छोटे और सीमांत किसानों की पहुँच से बाहर है।

  • सरकारी सहायता की अपर्याप्तता: किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी और जागरूकता अभियान, समस्या की विशालता को देखते हुए, पर्याप्त नहीं हैं।

आगे की राह

 

पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल जुर्माना लगाना काफी नहीं है। सरकार को किसानों के लिए पराली प्रबंधन की मशीनों को किराए पर (Custom Hiring Centers के माध्यम से) उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। साथ ही, पराली को खाद या बायो-फ्यूल बनाने के लिए इस्तेमाल करने हेतु नए औद्योगिक मॉडल को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि पराली जलाना किसानों के लिए आर्थिक रूप से अलाभकारी न रहकर लाभकारी बन जाए। तत्काल प्रभाव से, नागरिकों को फेस मास्क पहनने और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️