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💨 राजस्थान में वायु प्रदूषण का ‘गंभीर’ संकट: श्रीगंगानगर और चूरू में ज़हरीली हुई हवा

राजस्थान के कई शहर, विशेषकर चूरू और श्रीगंगानगर, इन दिनों गंभीर स्तर के वायु प्रदूषण (Air Pollution) का सामना कर रहे हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँचने से इन क्षेत्रों की आबोहवा ज़हरीली हो गई है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।


 

AQI का ‘गंभीर’ स्तर

 

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों की सांद्रता को दर्शाता है और स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव को बताता है। AQI को निम्न श्रेणियों में बाँटा जाता है:

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AQI स्तर श्रेणी स्वास्थ्य प्रभाव
0 – 50 अच्छा (Good) न्यूनतम प्रभाव
101 – 200 मध्यम (Moderate) फेफड़ों और हृदय रोगियों को सांस लेने में तकलीफ
201 – 300 खराब (Poor) अधिकांश लोगों को स्वास्थ्य समस्या
301 – 400 बहुत खराब (Very Poor) सांस की बीमारियाँ, लंबे समय तक एक्सपोजर पर गंभीर असर
401 – 500 गंभीर (Severe) स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित करता है, गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
500+ खतरनाक (Hazardous) आपातकालीन स्थिति, जानलेवा

श्रीगंगानगर और चूरू में AQI का ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में पहुँचना यह दर्शाता है कि हवा की गुणवत्ता अत्यंत खतरनाक हो चुकी है, जिससे निवासियों को सांस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन और दिल व फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।


 

प्रदूषण के प्रमुख कारण

 

इन सीमावर्ती और रेगिस्तानी शहरों में प्रदूषण के स्तर के खतरनाक रूप से बढ़ने के कई क्षेत्रीय और मौसमी कारण हैं:

  • पराली जलाना (Stubble Burning): श्रीगंगानगर, जो पंजाब की सीमा से सटा हुआ है, वहाँ पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली (फसल अवशेष) का धुआँ हवा के साथ आकर क्षेत्र की हवा को दूषित करता है।
  • रेगिस्तानी धूल (Desert Dust): शुष्क मौसम और तेज हवाओं के कारण रेगिस्तानी धूल के महीन कण (PM10 और PM2.5) वातावरण में घुल जाते हैं। चूरू और बीकानेर जैसे शहर इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं।
  • तापमान व्युत्क्रमण (Temperature Inversion): अक्टूबर और नवंबर के महीनों में, तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास ही फँस जाते हैं और ऊपर नहीं उठ पाते, जिससे स्मॉग (Smog) छा जाता है।
  • स्थानीय उत्सर्जन: निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआँ और औद्योगिक उत्सर्जन (जैसे ईंट भट्टे) भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं।

 

अन्य प्रभावित शहर

 

‘गंभीर’ स्तर के अलावा, राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत कई अन्य शहरों में भी AQI ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है। भिवाड़ी, हनुमानगढ़, बीकानेर, अलवर, और भरतपुर जैसे शहरों में भी प्रदूषण का स्तर ऊँचा बना रहता है। इस बिगड़ती वायु गुणवत्ता के कारण संवेदनशील लोगों, जैसे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा/हृदय रोगियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️