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🐕 सनसनीखेज रिपोर्ट: सड़क पर ‘काल’ बनकर आया कुत्ता, बाइक सवार की दर्दनाक मौत!

शहर की रफ्तार, एक मासूम उम्मीद और अचानक सामने आई मौत! श्रीगंगानगर की सड़कों पर आज जो हुआ, उसने प्रशासन के दावों और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हँसता-खेलता परिवार उजड़ गया, और वजह बनी—प्रशासन की लापरवाही और आवारा कुत्तों का बेखौफ आतंक। यह महज एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम द्वारा किया गया एक ‘संस्थागत कत्ल’ है। आइए जानते हैं उस काली रात की पूरी दास्तां जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।


🏍️ पल भर में मातम में बदली जिंदगी

घटना कल देर शाम की है, जब 24 वर्षीय राहुल (परिवर्तित नाम) अपने काम से घर लौट रहा था। घर पर मां उसका इंतजार कर रही थी, चूल्हे पर रोटियां सिक रही थीं, लेकिन राहुल की किस्मत में घर की दहलीज लांघना नहीं लिखा था। वह अपनी बाइक से निर्माणाधीन सड़क मार्ग से गुजर रहा था, तभी अचानक अंधेरे से एक आवारा कुत्ता ‘काल’ बनकर उसकी बाइक के सामने आ गया।

बाइक की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन अचानक आए कुत्ते को बचाने के चक्कर में राहुल ने जैसे ही ब्रेक मारा, उसकी बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई। बदकिस्मती देखिए, सड़क के किनारे नगर विकास न्यास (UIT) द्वारा छोड़े गए नुकीले पत्थरों और मलबे के ढेर पर राहुल का सिर जा लगा। मौत इतनी बेरहम थी कि उसे संभलने का एक मौका तक नहीं मिला।

🏗️ खूनी सड़कें और ‘यमराज’ बना मलबा

श्रीगंगानगर की सड़कों का हाल किसी से छिपा नहीं है। महीनों से निर्माणाधीन सड़कें कछुआ चाल से चल रही हैं। सड़क के बीचों-बीच पड़ा निर्माण सामग्री का ढेर और खुले पड़े गड्ढे अब राहगीरों के लिए मौत का जाल बन चुके हैं।

सनसनीखेज लापरवाही:

  • बिना रेडियम/संकेतक निर्माण: ठेकेदारों ने सड़क पर मलबा तो डाल दिया, लेकिन रात के अंधेरे में वाहन चालकों को सचेत करने के लिए न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाया और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।

  • अंधेरे का साम्राज्य: जिस मार्ग पर यह हादसा हुआ, वहां की स्ट्रीट लाइट्स हफ्तों से बंद पड़ी थीं। अंधेरे ने आवारा कुत्ते और सड़क के मलबे को ‘अदृश्य दुश्मन’ बना दिया।

🐕 आवारा कुत्तों का आतंक: कौन है जिम्मेदार?

शहर का कोई भी कोना ऐसा नहीं है जहां आवारा कुत्तों के झुंड राहगीरों का पीछा न करते हों। पिछले छह महीनों में कुत्तों के काटने और उनकी वजह से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 40% का इजाफा हुआ है। नसबंदी और डॉग शेल्टर के नाम पर लाखों का बजट कागजों में दौड़ रहा है, लेकिन धरातल पर कुत्ते आज भी सड़कों पर ‘यमराज’ की तरह घूम रहे हैं।

“मेरा बेटा तो चला गया, लेकिन क्या प्रशासन उन कुत्तों और उस मलबे को हटाएगा जो अब भी दूसरों की जान के दुश्मन बने हुए हैं?” — मृतक के पिता की चीख ने अस्पताल परिसर को रुला दिया।

⚠️ जनता का फूट रहा गुस्सा

हादसे के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दी। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार पार्षद और नगर परिषद को पत्र लिखकर आवारा कुत्तों की समस्या और अधूरी सड़कों के बारे में शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। आज एक मां की गोद सूनी हो गई, और इसके लिए सीधे तौर पर वो अधिकारी जिम्मेदार हैं जो वातानुकूलित कमरों में बैठकर ‘विकास’ की फाइलें पलट रहे हैं।


📢 तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?

  1. क्या नगर परिषद आवारा कुत्तों के आतंक से शहर को निजात दिलाने के लिए किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही थी?

  2. निर्माणाधीन सड़कों पर सुरक्षा मानकों (Safety Norms) की अनदेखी करने वाले ठेकेदारों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  3. क्या एक मासूम की जान की कीमत सिर्फ मुआवजे की कुछ किस्तों तक ही सीमित रहेगी?


सावधान रहें: श्रीगंगानगर की सड़कों पर चलते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि यहाँ की सड़कें और आवारा पशु आपकी सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️