🢀
🌫️ श्रीगंगानगर पर प्रदूषण का ‘गंभीर’ साया बरकरार: स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति

श्रीगंगानगर, 6 नवंबर, 2025: एक तरफ जहां श्रीगंगानगर में तापमान गिर रहा है और सर्दी का अहसास बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में सुधार न होने के कारण प्रदूषण का गंभीर संकट बरकरार है। पिछले दिनों रिकॉर्ड किए गए बेहद खतरनाक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर ने श्रीगंगानगर को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर बनाए रखा है, जो यहां के निवासियों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय है।

 

📊 AQI 830: प्रदूषण की भयावह स्थिति

 

हालांकि 6 नवंबर के लिए सटीक दैनिक AQI आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, पिछले दिनों की रिपोर्ट अत्यंत भयावह थी, जब श्रीगंगानगर का AQI स्तर 830 तक पहुंच गया था। AQI का 401 से 500 के बीच होना ही ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में आता है, जबकि 830 का स्तर बताता है कि हवा में सूक्ष्म प्रदूषक कणों (PM 2.5 और PM 10) की सांद्रता सामान्य से कई गुना अधिक है।

यह खतरनाक स्तर न केवल सबसे कमजोर आबादी (बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों) के लिए बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा करता है। इस हवा में साँस लेने का मतलब है फेफड़ों और हृदय को गंभीर जोखिम में डालना।

 

🚫 प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण

 

नवंबर महीने की शुरुआत में प्रदूषण का यह स्तर मुख्य रूप से उत्तर भारत की एक बड़ी मौसमी और क्षेत्रीय समस्या से जुड़ा हुआ है:

  • पराली जलाना: आसपास के कृषि क्षेत्रों में फसल अवशेषों (पराली) को जलाने से भारी मात्रा में धुआँ और राख वायुमंडल में मिल रहे हैं।
  • मौसम का प्रभाव: सर्दी की शुरुआत के साथ, हवा की गति कम हो जाती है और तापमान में गिरावट आती है, जिससे प्रदूषक कण जमीन के करीब ही फंस जाते हैं और धुंध (Smog) की मोटी परत बना लेते हैं।
  • वाहन और उद्योग: स्थानीय वाहनों का उत्सर्जन और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला धुआँ इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

 

😷 स्वास्थ्य पर सीधा खतरा

 

AQI के उच्च स्तर पर बने रहने का सबसे बड़ा खामियाजा शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि इस दूषित हवा के कारण सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा के दौरे, आंखों में जलन, खांसी और ब्रोंकाइटिस के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से फेफड़ों के कैंसर और हृदय रोग का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए यह जरूरी है कि वे इस अदृश्य संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाएं। इसमें न केवल पराली जलाने पर सख्त रोक लगाना शामिल है, बल्कि सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय लागू करना और लोगों को उच्च प्रदूषण वाले समय में घर के अंदर रहने की सलाह देना भी शामिल है।

श्रीगंगानगर के निवासियों के लिए, बाहर निकलने से पहले AQI की जांच करना और N95 मास्क पहनना अब एक अनिवार्य एहतियाती उपाय बन गया है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️