
श्रीगंगानगर में मंगलवार को अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के राज्यव्यापी आह्वान पर सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने प्रशासनिक प्रताड़ना के विरोध में एक अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन न केवल वेतन या भत्तों से जुड़ा था, बल्कि सीधे तौर पर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।
😟 आत्महत्याओं की घटनाओं पर चिंता
प्रदर्शन का मुख्य कारण हाल के दिनों में सरकारी कर्मचारियों, खासकर शिक्षकों के बीच प्रशासनिक और मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं में हुई वृद्धि थी। महासंघ ने आरोप लगाया कि विभागों के उच्च अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों पर अवास्तविक लक्ष्यों का दबाव, अत्यधिक कार्यभार (ओवरलोडिंग), और अमानवीय व्यवहार किया जाता है, जिसके कारण कई कर्मचारी गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और अंततः निराशा में आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें काम करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अधिकारी वर्ग का दमनात्मक रवैया और अकारण होने वाली मानसिक प्रताड़ना असहनीय हो गई है। कर्मचारियों ने मांग की कि इस तरह की प्रताड़ना करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
⚫ काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
महासंघ से जुड़े हजारों सरकारी कर्मचारी और शिक्षक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शन के एक अनूठे और प्रभावी तरीके को अपनाया। सभी कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यालयों में काम किया। यह सांकेतिक विरोध शांतिपूर्ण होते हुए भी अपनी बात को मजबूती से रखने का एक सशक्त तरीका था।
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शिक्षक वर्ग: स्कूलों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया।
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अन्य विभाग: कलेक्ट्रेट, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग और अन्य सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों ने भी इसी तरह विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियाँ ले रखी थीं जिन पर “प्रताड़ना बंद करो,” “आत्महत्याओं पर रोक लगाओ,” और “मानसिक प्रताड़ना के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो” जैसे नारे लिखे हुए थे।
📝 ज्ञापन सौंपकर की ठोस कार्रवाई की मांग
विरोध प्रदर्शन के बाद, महासंघ के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख माँगें रखीं:
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प्रताड़ना निवारण समिति: प्रत्येक सरकारी विभाग में एक प्रताड़णा निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) का गठन किया जाए, जिसमें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
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दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: उन अधिकारियों की पहचान कर उन पर तुरंत विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए जिनके व्यवहार के कारण कर्मचारी आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं।
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कार्यभार संतुलन: कर्मचारियों पर अत्यधिक और अमानवीय कार्यभार डालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए।
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मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता: कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए जाएं।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर राज्य सरकार ने जल्द ही कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया, तो यह विरोध प्रदर्शन और उग्र हो सकता है और वे सामूहिक अवकाश पर जाने जैसा बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि अब कर्मचारी अपने मान-सम्मान और सुरक्षित कार्य वातावरण के लिए संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं।