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⚖️ सनसनीखेज रिपोर्ट: खाकी पर दाग – रिश्वतखोर कनिष्ठ सहायक रंगे हाथों धराया!

भ्रष्टाचार की दीमक जब सरकारी तंत्र को खोखला करने लगे, तो ‘एसीबी’ (Anti-Corruption Bureau) का डंडा चलना लाजिमी है। आज श्रीगंगानगर में एक ऐसी ही सनसनीखेज कार्रवाई हुई, जिसने सरकारी दफ्तरों की दीवारों के पीछे चल रहे ‘रिश्वत के काले खेल’ को बेनकाब कर दिया है। एक कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant), जिसे जनता की सेवा की शपथ दिलाई गई थी, उसने चंद रुपयों के लालच में न केवल अपनी कुर्सी का अपमान किया, बल्कि पूरी ‘खाकी’ और प्रशासनिक साख पर गहरा दाग लगा दिया।


🕸️ जाल बिछाया और ‘मछली’ फंसी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की श्रीगंगानगर इकाई को पिछले कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं कि एक सरकारी विभाग के दफ्तर में बिना ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) के कोई फाइल आगे नहीं सरकती। आज की यह कार्रवाई एक पीड़ित व्यक्ति की हिम्मत का परिणाम थी, जिसने भ्रष्ट तंत्र के आगे झुकने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाया।

घटना का विवरण: पीड़ित का एक सरकारी काम लंबे समय से लंबित था। कनिष्ठ सहायक राकेश (परिवर्तित नाम) बार-बार उसे चक्कर कटवा रहा था। जब पीड़ित ने काम पूरा करने की गुहार लगाई, तो बाबू ने साफ कह दिया— “बिना मिठाई खिलाए फाइल को पहिए नहीं लगेंगे।” उसने काम के बदले ₹15,000 की मांग की। पीड़ित ने तुरंत इसकी सूचना एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों को दी।

💸 रंगे हाथों गिरफ्तारी: गुलाबी नोटों का ‘काला’ सच

एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। पीड़ित को पाउडर लगे हुए नोट देकर बाबू के पास भेजा गया। जैसे ही कनिष्ठ सहायक ने अपनी दराज में रिश्वत की राशि रखी और पीड़ित को काम होने का आश्वासन दिया, ठीक उसी समय सादे कपड़ों में तैनात एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया।

कार्रवाई की सनसनी:

  • गुलाबी हुए हाथ: जैसे ही आरोपी के हाथ पानी से धुलवाए गए, पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का पुख्ता सबूत था कि उसने रिश्वत के नोट छुए थे।

  • हड़कंप का माहौल: गिरफ्तारी के वक्त दफ्तर में अन्य कर्मचारी और आम जनता मौजूद थी। जैसे ही एसीबी की टीम ने आरोपी को पकड़ा, पूरे दफ्तर में सन्नाटा पसर गया। कई कर्मचारी तो डर के मारे अपनी सीटों से गायब हो गए।

  • दस्तावेज जब्त: एसीबी ने आरोपी की टेबल से जुड़ी कई संदिग्ध फाइलें और डायरी भी जब्त की है, जिसमें अन्य लोगों से लेनदेन के संकेत मिले हैं।

🏛️ सरकारी दफ्तरों में ‘भय’ का माहौल

इस कार्रवाई के बाद श्रीगंगानगर के अन्य सरकारी विभागों में खलबली मच गई है। लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि यह तो सिर्फ ‘छोटी मछली’ है, बड़े मगरमच्छ तो अभी भी गहरे पानी में हैं। एसीबी की इस छापेमारी ने उन भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है जो जनता के टैक्स के पैसों पर पलते हैं और फिर उन्हीं से रिश्वत वसूलते हैं।

“भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। कोई भी लोक सेवक यदि काम के बदले पैसे की मांग करता है, तो तुरंत हमारे टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करें। हम इस कनिष्ठ सहायक के नेटवर्क की भी जांच कर रहे हैं।” — एसीबी महानिदेशक (बयान)

⚠️ ‘खाकी’ और सिस्टम की साख पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब श्रीगंगानगर में कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा गया हो, लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं जनता का सिस्टम से भरोसा उठा देती हैं। कनिष्ठ सहायक की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। अब आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहाँ से उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी है।


📢 आम जनता के लिए संदेश

भ्रष्टाचार को सहना भी एक अपराध है। अगर आपसे कोई सरकारी बाबू काम के बदले पैसे मांगे, तो डरे नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (1064) को सूचित करें। आपकी एक सतर्कता समाज से इस गंदगी को साफ कर सकती है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️