
श्री गंगानगर जिले के रायसिंहनगर में स्थित एक प्रमुख बिश्नोई मंदिर की प्रबंधन और दान की गई भूमि (donated land) के स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद मंगलवार (19 नवंबर) को चरम पर पहुंच गया। दो प्रभावशाली गुटों के बीच बढ़ते तनाव, आरोप-प्रत्यारोप और बार-बार के टकराव को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने और मंदिर की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए, उपखंड अधिकारी (SDM) ने तहसीलदार हर्षिता मिड्डा को तत्काल प्रभाव से मंदिर का प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया है। अब मंदिर के सभी वित्तीय, प्रशासनिक और भूमि संबंधी निर्णय तहसीलदार की देखरेख में लिए जाएंगे, जब तक कि विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता।
विवाद का केंद्र: दान की गई ज़मीन और प्रबंधन अधिकार
विवाद की जड़ मंदिर को भक्तों द्वारा दान की गई करोड़ों रुपए की कृषि भूमि (agricultural land) और मंदिर के प्रबंधन (management) पर नियंत्रण स्थापित करने की होड़ है। एक गुट का आरोप है कि वर्तमान प्रबंधन दान की गई संपत्ति का दुरुपयोग कर रहा है और धार्मिक भावनाओं के विपरीत कार्य कर रहा है। वहीं, दूसरा गुट इन आरोपों को निराधार बता रहा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और मंदिर के कोष में हेराफेरी करने के आरोप लगाए हैं, जिससे क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बिगड़ने लगा था।
5 दिन से बंद था मंदिर का मुख्य द्वार
विवाद की पराकाष्ठा तब पहुंची जब टकराव की आशंका के चलते मंदिर के मुख्य दरवाजे को चार दिनों के लिए बंद करना पड़ा था। इस कारण श्रद्धालुओं में भारी निराशा और आक्रोश था, क्योंकि वे धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पा रहे थे।
प्रशासक की नियुक्ति के बाद मंगलवार को अमावस्या (Amavasya) का शुभ अवसर था, जो बिश्नोई समाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में, बंद पड़े मंदिर के मुख्य द्वार को पांचवें दिन खोला। तहसीलदार मिड्डा की देखरेख में मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना शुरू की गई। इस दौरान दोनों विवादित गुटों के सदस्यों को नियंत्रित दूरी पर रखा गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
तहसीलदार हर्षिता मिड्डा ने कार्यभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा करना, दान का सही उपयोग सुनिश्चित करना और सभी श्रद्धालुओं के लिए शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन की व्यवस्था करना है। उन्होंने दोनों गुटों से सहयोग की अपील की है और चेतावनी दी है कि यदि किसी भी पक्ष ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब दान की गई भूमि से जुड़े सभी राजस्व रिकॉर्ड (revenue records) की गहन जांच करेगा और मंदिर के आय-व्यय का ऑडिट करवाया जाएगा, ताकि विवाद को जड़ से खत्म किया जा सके।