
श्रीगंगानगर, 1 मार्च 2026: फाल्गुन मास की शुरुआत के साथ ही सरहदी जिले श्रीगंगानगर में होली के त्योहार की रंगत परवान चढ़ने लगी है। शहर के मुख्य बाजारों—गोल बाजार, पुरानी आबादी और रवींद्र पथ—में सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस साल की होली न केवल रंगों से भरी है, बल्कि इसमें तकनीक और नवीनता (Innovation) का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। व्यापारियों के अनुसार, 2026 की होली पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक ‘चमकदार’ और ‘धमाकेदार’ होने वाली है।
1. ‘डिस्को गुलाल’ और ‘निऑन कलर्स’ का क्रेज
इस साल बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा ‘डिस्को गुलाल’ की है। यह एक विशेष प्रकार का गुलाल है जिसमें सूक्ष्म चमकीले कण (Metallic Glitter) मिलाए गए हैं, जो रोशनी पड़ने पर चमकते हैं। युवाओं और बच्चों के बीच यह गुलाल पहली पसंद बना हुआ है।
-
विशेषता: यह गुलाल त्वचा के लिए सुरक्षित बताया जा रहा है और रात की ‘होली पार्टियों’ के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
-
निऑन कलर्स: डिस्को गुलाल के साथ-साथ ‘निऑन’ (चमकीले गुलाबी, हरे और पीले) रंगों की भी भारी मांग है, जो अंधेरे में या डिस्को लाइट्स में अलग ही निखार देते हैं।
2. रंग बरसाने वाले पटाखे: एक नया अनुभव
इस बार श्रीगंगानगर के पटाखों के बाजार में एक नई वैरायटी आई है—‘कलर स्मोक गन’ और ‘रंगीन अनार’।
-
कैसे काम करते हैं: ये पटाखे पारंपरिक शोर करने वाले पटाखों की तरह नहीं हैं। इन्हें चलाने पर आसमान में तेज आवाज के बजाय सतरंगी रंगों का धुआं और गुलाल की बौछार होती है।
-
कलर फॉग: शादी-ब्याह की तरह अब होली पर भी ‘कलर फॉग’ के केन (Cans) बिक रहे हैं, जो एक बार बटन दबाने पर 30 सेकंड तक लगातार रंगीन हवा छोड़ते हैं। यह फोटोशूट और रील बनाने वाले युवाओं के बीच हॉट केक की तरह बिक रहा है।
3. ‘हाई-टेक’ पिचकारियां और गैजेट्स
पुराने जमाने की पीतल या प्लास्टिक की साधारण पिचकारियों की जगह अब ‘इलेक्ट्रिक वॉटर गन’ ने ले ली है।
-
बैटरी ऑपरेटेड: ये पिचकारियां रिचार्जेबल बैटरी से चलती हैं और एक बार ट्रिगर दबाने पर काफी दूरी तक पानी की धार छोड़ती हैं।
-
प्रेशर पंप: बड़े बच्चों के लिए ‘पंप एक्शन’ वाली बड़ी गन उपलब्ध हैं, जो दिखने में आधुनिक राइफलों जैसी लगती हैं। इनमें 5 से 10 लीटर तक पानी स्टोर करने वाले टैंक (Backpack) भी साथ मिल रहे हैं, जिन्हें बच्चे अपनी पीठ पर बस्ते की तरह टांग सकते हैं।
4. हर्बल गुलाल और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
बाजार में बढ़ती चमक-धमक के बीच स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता भी कम नहीं हुई है। श्रीगंगानगर के जागरूक नागरिक अब पक्के रंगों (Chemical Colors) के बजाय हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
-
फूलों और फलों से बने रंग: स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लोग अब ₹10 के पैकेट के बजाय ₹50 का वह पैकेट लेना पसंद कर रहे हैं जो हल्दी, गुलाब की पंखुड़ियों और चंदन से बना हो।
-
स्किन फ्रेंडली: डॉक्टर भी लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें ताकि त्वचा और आंखों को नुकसान न पहुंचे।
5. व्यापारियों की उम्मीदें और आर्थिक सुधार
श्रीगंगानगर व्यापार मंडल के अनुसार, पिछले दो वर्षों की तुलना में इस साल व्यापार में 25% से 30% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
-
आयातित और स्वदेशी: हालांकि कुछ हाई-टेक खिलौने बाहर से मंगवाए गए हैं, लेकिन अधिकांश गुलाल और पारंपरिक सामान स्थानीय कुटीर उद्योगों द्वारा तैयार किया गया है।
-
मिठाइयों का बाजार: रंगों के साथ-साथ घेवर, गुझिया और ठंडाई के लिए भी हलवाइयों ने अभी से एडवांस बुकिंग शुरू कर दी है।
सुरक्षा और सावधानी
त्योहार की इस उमंग के बीच प्रशासन ने भी कमर कस ली है। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए हैं कि बाजारों में भीड़भाड़ वाले इलाकों में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे ताकि हुड़दंगियों पर लगाम कसी जा सके। साथ ही, मिलावटी रंगों और रसायनों की जांच के लिए भी नमूने लिए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर की यह होली तकनीक, स्वास्थ्य और परंपरा का एक बेहतरीन मिश्रण साबित होने वाली है। बाजारों की यह रौनक बताती है कि लोग अपनी संस्कृति को आधुनिकता के रंग में रंगकर मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।