
मुख्य बिंदु:
-
सघन कवरेज: 7 मई को जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) पर विशेष शिविरों का आयोजन।
-
लक्षित समूह: नवजात शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच कर किया गया पूर्ण टीकाकरण।
-
जागरूकता अभियान: चिलचिलाती गर्मी और मौसमी बीमारियों (लू, डायरिया, डेंगू) से बचाव के लिए ग्रामीणों को दिए गए स्वास्थ्य टिप्स।
स्वास्थ्य सुरक्षा का महा-अभियान: आंगनबाड़ी से CHC तक
श्रीगंगानगर जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और हर बच्चे तक सुरक्षा का कवच पहुंचाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय है। इसी कड़ी में 7 मई को विभाग की ओर से पूरे जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एक वृहद और विशेष टीकाकरण सह स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया।
यह अभियान सुबह से ही जिले के सभी सूचीबद्ध आंगनबाड़ी केंद्रों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) पर एक साथ शुरू हुआ। सुबह से ही केंद्रों पर अपने नौनिहालों को गोद में लिए माताएं और स्वास्थ्य जांच के लिए गर्भवती महिलाएं पहुंचने लगी थीं। स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के कारण इस अभियान को जमीनी स्तर पर व्यापक सफलता मिली।
व्यापक टीकाकरण: बीमारियों पर अंतिम प्रहार
इस विशेष शिविर के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ANMs), आशा सहयोगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संयुक्त टीमों ने शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सूची के आधार पर छूटे हुए लोगों को ट्रैक किया।
टीकाकरण रिपोर्ट: अभियान के तहत बच्चों को जानलेवा बीमारियों जैसे—खसरा (Measles), रूबेला, काली खांसी, टिटनस, हेपेटाइटिस-बी और पोलियो से बचाव के टीके व खुराक दी गई। वहीं, गर्भवती महिलाओं को टिटनस-एडल्ट डिप्थीरिया (Td) के टीके लगाए गए।
इसके साथ ही, बच्चों में कुपोषण की जांच के लिए उनका वजन और लंबाई मापी गई। जिन बच्चों में पोषण की कमी पाई गई, उनके माता-पिता को विशेष पोषण किट और आवश्यक परामर्श दिया गया। गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर की मुफ्त जांच कर उन्हें आयरन, फॉलिक एसिड और कैल्शियम की दवाइयां वितरित की गईं।
मौसमी बीमारियों पर जन-जागरूकता सत्र: गर्मी का मुकाबला
मई के इस महीने में श्रीगंगानगर में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का प्रकोप अपने चरम पर रहता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने केवल टीकाकरण तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि हर केंद्र पर जन-जागरूकता सत्र भी आयोजित किए।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शिविर में आए नागरिकों को संबोधित करते हुए मौसमी बीमारियों, विशेष रूप से लू लगना, डायरिया (उल्टी-दस्त), फूड पॉइजनिंग और जल-जनित बीमारियों से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए:
-
लू से बचाव: दोपहर के समय बिना वजह बाहर न निकलने, सूती व ढीले कपड़े पहनने और घर से बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखने की सलाह दी गई।
-
हाइड्रेशन का महत्व: ओआरएस (ORS) घोल, नींबू पानी, छाछ और ओट की राबड़ी जैसे घरेलू पेय पदार्थों के अधिक से अधिक सेवन पर जोर दिया गया।
-
मच्छर जनित बीमारियां: हालांकि यह गर्मी का मौसम है, फिर भी पानी के ठहराव को रोकने और कूलर व टंकियों की नियमित सफाई करने की हिदायत दी गई ताकि आने वाले समय में डेंगू और मलेरिया के पनपने की गुंजाइश न रहे।
प्रशासनिक मुस्तैदी और जनभागीदारी
इस विशेष अभियान की सफलता के पीछे स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की सख्त मॉनिटरिंग रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) सहित ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (BCMOs) की टीमों ने ग्रामीण क्षेत्रों के कई केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कोल्ड चेन (टीकों को सुरक्षित रखने का तापमान) और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था का जायजा लिया और मुस्तैदी की सराहना की।
स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में, इस अभियान को लेकर भारी उत्साह देखा गया। आशा सहयोगिनियों ने घर-घर जाकर जो पीले चावल देकर न्योता दिया था, उसका असर यह हुआ कि शाम तक रिकॉर्ड संख्या में पंजीकरण और टीकाकरण का आंकड़ा दर्ज किया गया। चिकित्सा विभाग के अनुसार, इस तरह के नियमित और विशेष शिविर भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि श्रीगंगानगर का हर नागरिक, बच्चा और मां पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रह सके।