
श्रीगंगानगर (सूरतगढ़): राजस्थान के ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख केंद्र, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। सोमवार दोपहर प्लांट की एक महत्वपूर्ण इकाई की कोयला मिल (Coal Mill) में अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई। धमाके की गूंज इतनी शक्तिशाली थी कि प्लांट परिसर में मौजूद सैकड़ों श्रमिक और तकनीकी कर्मचारी दहशत में आ गए। देखते ही देखते आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया और पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
घटना का विस्तृत विवरण: कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा थर्मल पावर प्लांट की 660 मेगावाट वाली सुपर क्रिटिकल इकाई में घटित हुआ। दोपहर के समय जब मिलिंग प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी, तभी अचानक एक यूनिट की कोयला मिल के भीतर दबाव बढ़ने या तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना जबरदस्त था कि मिल के आसपास के कुछ हिस्सों में दरारें आ गईं और आग की लपटें कई फीट ऊंची उठने लगीं।
विस्फोट के तुरंत बाद प्लांट का इमरजेंसी अलार्म बज उठा। थर्मल प्रशासन ने बिना देरी किए दमकल विभाग को सूचित किया। मौके पर प्लांट की अपनी फायर फाइटिंग टीम के साथ-साथ सूरतगढ़ शहर से भी दमकल की गाड़ियां पहुँचीं। करीब दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका।
सुरक्षा और जनहानि: गनीमत रही कि टला बड़ा हादसा
इस भीषण घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि किसी भी श्रमिक या कर्मचारी के हताहत होने की खबर नहीं है। विस्फोट के समय मिल के ठीक पास कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से बच गया। हालांकि, धुएं के कारण कुछ कर्मचारियों को सांस लेने में हल्की तकलीफ की शिकायत हुई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
सुरक्षा की दृष्टि से प्लांट प्रशासन ने तुरंत प्रभावित इकाई के साथ-साथ आसपास की संवेदनशील मशीनों को भी ‘शटडाउन’ मोड पर डाल दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
तकनीकी कारण और करोड़ों का नुकसान
शुरुआती तकनीकी जांच में आग लगने का संभावित कारण ‘कोल डस्ट एक्सप्लोजन’ (कोयले की धूल में विस्फोट) या घर्षण (Friction) की वजह से पैदा हुई चिंगारी को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला मिलों में अत्यधिक तापमान और बारीक धूल के कारण कभी-कभी इस तरह के ‘पल्वेराइजर एक्सप्लोजन’ हो जाते हैं।
इस हादसे में थर्मल प्लांट की बेशकीमती मशीनरी, विशेष रूप से कोयला पीसने वाली मिल और उससे जुड़ी पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुँचा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस क्षति को ठीक करने और इकाई को फिर से शुरू करने में करोड़ों रुपये का खर्च आएगा और इसमें कई दिनों का समय लग सकता है।
बिजली उत्पादन पर संकट और वर्तमान स्थिति
सूरतगढ़ थर्मल प्लांट राजस्थान के पावर ग्रिड को बिजली सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा स्रोत है। इस हादसे के कारण प्रभावित इकाई से उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। थर्मल प्रशासन अब इस बात का आकलन कर रहा है कि इस शटडाउन के कारण राज्य की बिजली आपूर्ति पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
थर्मल प्रशासन का आधिकारिक बयान:
“स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। आग बुझा दी गई है और कूलिंग प्रक्रिया जारी है। हमने घटना के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। हमारी प्राथमिकता मशीनरी की मरम्मत कर जल्द से जल्द उत्पादन बहाल करना है।”
आगे की राह और सावधानी
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और पुरानी होती मशीनरी के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थर्मल प्लांट में बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियां न केवल राजस्व का नुकसान करती हैं, बल्कि काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की जान को भी जोखिम में डालती हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ‘सेंसर आधारित फायर सप्रेसेंट सिस्टम’ की गहन जांच की जाएगी।
फिलहाल, सूरतगढ़ में स्थिति शांत है, लेकिन प्लांट की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय निवासियों और किसानों में भी इस बात को लेकर चिंता है कि कहीं इस हादसे के कारण क्षेत्र में बिजली कटौती का सामना न करना पड़े।