
सूरतगढ़, श्रीगंगानगर: राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट से आज एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई। प्लांट की 7वीं इकाई (Unit 7) की कोयला मिल (Coal Mill) में अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद प्लांट परिसर में हड़कंप मच गया। यह घटना न केवल औद्योगिक सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि एक बड़े संकट की आहट भी थी, जिसे समय रहते टाल दिया गया।
घटना का विवरण और तत्काल प्रभाव
प्रत्यक्षदर्शियों और प्लांट के कर्मचारियों के अनुसार, आज सुबह जब काम सामान्य रूप से चल रहा था, तभी अचानक मिल क्षेत्र से कान फोड़ देने वाली आवाज आई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की मशीनरी में कंपन महसूस किया गया। धमाके के तुरंत बाद कोयले के बारीक कणों (Coal Dust) ने आग पकड़ ली और मिल से काले धुएं का गुबार उठने लगा।
घटना स्थल पर मौजूद श्रमिकों में अफरा-तफरी मच गई और वे अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। थर्मल पावर प्लांट जैसे संवेदनशील स्थान पर आग लगना बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि वहां भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ और उच्च दाब वाली मशीनरी मौजूद होती है।
दमकल विभाग की मुस्तैदी और राहत कार्य
धमाके की सूचना मिलते ही प्लांट का आंतरिक सुरक्षा तंत्र और फायर ब्रिगेड की टीम सक्रिय हो गई। दमकल की गाड़ियों ने बिना समय गंवाए आग पर काबू पाने की प्रक्रिया शुरू की। कोयले की आग को बुझाना चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसमें छिपी हुई ऊष्मा (Latent Heat) दोबारा आग भड़काने की क्षमता रखती है। हालांकि, दमकल कर्मियों की सूझबूझ से करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझा दिया गया और उसे अन्य संवेदनशील इकाइयों तक फैलने से रोक लिया गया।
तकनीकी कारण और जांच के आदेश
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि कोयला मिल के भीतर अत्यधिक दबाव (Pressure) या तकनीकी घर्षण के कारण ‘स्पार्क’ हुआ होगा। थर्मल पावर प्लांट में कोयले को बारीक पाउडर के रूप में पीसा जाता है ताकि उसे बॉयलर में जलाया जा सके। यह कोयला पाउडर (Pulverized Coal) अत्यंत ज्वलनशील होता है और हवा के साथ मिलकर विस्फोटक मिश्रण बना सकता है।
प्लांट प्रशासन ने इस घटना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। इंजीनियरों की एक विशेष टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मानवीय चूक थी, मशीनरी की खराबी थी, या मेंटेनेंस (रखरखाव) में कोई कमी रह गई थी।
बिजली उत्पादन पर असर
राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि (Loss of life) नहीं हुई। प्रशासन के अनुसार, आग पर समय रहते काबू पा लिए जाने के कारण प्लांट की मुख्य मशीनरी और 660 मेगावाट की इस क्रिटिकल इकाई को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। शुरुआती आकलन के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिजली उत्पादन की निरंतरता पर कोई बड़ा विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है। मिल में आई खराबी को दुरुस्त करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
निष्कर्ष और सुरक्षा संबंधी चिंताएं
सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कोयला मिलों में धमाके अक्सर सेफ्टी वाल्व की विफलता या कोल डस्ट के संचय के कारण होते हैं। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों (Safety Standards) और नियमित ऑडिट की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
स्थानीय श्रमिक यूनियनों ने मांग की है कि पुरानी हो चुकी मशीनरी का नवीनीकरण किया जाए और सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके। फिलहाल, प्लांट में स्थिति नियंत्रण में है और तकनीकी टीम मरम्मत कार्य में जुटी हुई है।